लॉकडाउन में मकान मालिकों को किराया मांगना पड़ा महंगा, एफआईआर दर्ज

LOCKDOWN: पुलिस ने ऐसे 9 मकान मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जो लॉकडाउन के दौरान किराएदारों से किराया मांगने पहुंचे थे. सभी एफआईआर पश्चिमी दिल्ली के मुखर्जी नगर में दर्ज की गई हैं.
कोरोना वायरस के संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में लॉकडाउन जारी है. सभी आर्थिक गतिविधियों पर लगभग रोक लगी हुई है. इस कारण लोगों की जेब में पैसों की कमी हो गयी है. इसी बीच, पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मकान मालिकों से अपील की थी कि वे इस परेशानी के दिनों में किराएदारों पर थोडी नरमी दिखाएं और दो से तीन महीने का किराया माफ कर दें. कुछ मकान मालिक तो मान गये लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो किराये को लेकर परेशान कर रहे हैं जिनपर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की है.
जानकारी के अनुसार पुलिस ने ऐसे 9 मकान मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जो लॉकडाउन के दौरान किराएदारों से किराया मांगने पहुंचे थे. सभी एफआईआर पश्चिमी दिल्ली के मुखर्जी नगर में दर्ज की गई हैं. मुखर्जी नगर में ज्यादातर किराएदार पीजी में रहते हैं जिनका आरोप है कि मकान मालिक लॉकडाउन में किराया मांगने पहुंचे और उनपर दबाव डाला. किराएदारों ने कहा कि अभी उनके पास किराया देने के लिए पैसे नहीं हैं.
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आईपीसी की धारा 188 के तहत मामले दर्ज: मकान मालिक के दबाव के बाद ये लोग शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे. पुलिस ने 9 मकान मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आईपीसी की धारा 188 के तहत ये मामले दर्ज किए गए हैं. आपको बता दें कि यह धारा सरकारी काम में बाधा डालने के खिलाफ लगाई जाती है. यदि आरोप सही पाये जाएंगे तो मकान मालिकों को एक महीने तक की जेल हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. इधर कोटला मुबारकपुर में एक किराएदार ने अपने मकान मालिक के खिलाफ बिजली काटने की शिकायत पुलिस में दर्ज करायी है. हालांकि बाद में दोनों पक्षों में सुलह होने की खबर भी आयी. Lockdown से जुड़ी हर Latest News in Hindi से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.
केंद्रीय गृह मंत्रालय का गाइडलाइंस: आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी की है, जिसमें कहा गया कि यदि कोई मकान मालिक श्रमिकों या छात्रों पर किराए के लिए दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट या डिप्टी कमिश्नर पर है. एसएसपी, एसपी या डिप्टी पुलिस कमिश्नर भी इस कानून के तहत एक्शन लेने का काम कर सकते हैं.
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