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कांग्रेस में 'लेटर बम' का सामने आया शशि थरूर कनेक्शन, 5 माह पहले उनकी पार्टी में ही बना था सोनिया गांधी को पत्र लिखने का प्लान

Updated at : 25 Aug 2020 8:17 AM (IST)
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कांग्रेस में 'लेटर बम' का सामने आया शशि थरूर कनेक्शन, 5 माह पहले उनकी पार्टी में ही बना था सोनिया गांधी को पत्र लिखने का प्लान

Congress president,Sonia gandhi, congress news, cwc meeting: कांग्रेस में अध्‍यक्ष पद को लेकर सामने आए लेटर बम के कारण से पार्टी में जबरदस्‍त घमासान की स्थिति है. इस पत्र ने पार्टी में ओल्ड गार्ड बनाम यंग गार्ड की लड़ाई को हवा दे दी है. लेकिन यह सब हुआ कैसे ? कांग्रेस में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने का ख्याल किसका था? किन नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किया और किसने इनकार कर दिया?

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Congress president,Sonia gandhi, congress news, cwc meeting: कांग्रेस में अध्‍यक्ष पद को लेकर सामने आए लेटर बम के कारण से पार्टी में जबरदस्‍त घमासान की स्थिति है. इस पत्र ने पार्टी में ओल्ड गार्ड बनाम यंग गार्ड की लड़ाई को हवा दे दी है. लेकिन यह सब हुआ कैसे ? कांग्रेस में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने का ख्याल किसका था? किन नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किया और किसने इनकार कर दिया

इन सब बातों का खुलासा हो गया है. कई कांग्रेसी नेताओं के हवाले से एचटी ने लिखा है कि इस लेटर बम की शुरुआत 5 माह पहले शशि थरूर द्वारा आयोजित डिनर पार्टी के दौरान हुई थी. इस पार्टी में मौजूद नेताओं ने कहा है कि कुछ लोगों सोनिया गांधी को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर किया और किसी ने नहीं किया.

इन्होंने किया हस्ताक्षर से इनकार

रिपोर्ट के अनुसार, जिन 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है, उनमें पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं. एचटी के मुताबिक, थरूर के डिनर में शामिल होने वाले जिन्होंने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए उनमें पी चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति चिदंबरम, सचिन पायलट, अभिषेक मनु सिंघवी और मणिशंकर अय्यर हैं. यह पत्र सात अगस्त को सोनिया गांधी को भेजा गया था.

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अभिषेक मनु सिंघवी ने शशि थरूर की उस डिनर पार्टी में अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि मुझे एक दिन के नोटिस पर थरूर द्वारा डिनर पर बुलाया गया था. इसमें कांग्रेस के भीतर सुधारों के रचनात्मक मुद्दे पर एक अनौपचारिक चर्चा भी हुई थी लेकिन मुझे पत्र के बारे में किसी भी स्तर पर सूचित नहीं किया गया था.

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वह पार्टी के मामलों पर कोई कमेंट नहीं करना चाहते. वहीं हाल ही कांग्रेस से बगावत कर चुके सचिन पायलट ने भी इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की. रिपोर्ट के मुताबिक, शशि थरूर ने इस मामले में फोन कॉल्स और संदेशों का जवाब नहीं दिया.

पत्र भेजने की जरूरत थी

मणिशंकर अय्यर ने इस मामले में अधिक साफगोई से बात की. उन्होंने कहा कि मैंने हस्ताक्षर नहीं किया क्योंकि मुझे इसके लिए किसी ने संपर्क नहीं किया था. मार्च में डिनर पर, अय्यर ने कहा कि पार्टी को पुनर्जीवित करने और हमारे धर्मनिरपेक्ष क्रेडेंशियल्स पर वापस जाने की आवश्यकता पर एक सामान्य चर्चा हुई थी. इसमें एक सुझाव था, जिसका किसी ने विरोध नहीं किया , पत्र भेजने की जरूरत थी. हालांकि, किसी ने मुझे उस रात संपर्क नहीं किया था.

इस डिनर में शामिल होने वाले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य सांसद ने कहा कि पत्र में केवल मुद्दे थे, कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं था. अक्सर ऐसा होता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी आलाकमान से कुछ कहते हैं तो सुनवाई नहीं होता. इसलिए यह पत्र लिखना जरूरी था.

गौरतलब है कि पार्टी की कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने सोमवार को दिन भर चले बैठक में नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित विवादास्पद पत्र पर चर्चा की और फिर यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बैठक में आरोप लगाया है कि जिन्होंने इस वक्त चिट्ठी लिखी है वो भारतीय जनता पार्टी से मिले हुए हैं. राहुल गांधी के इस आरोप के बाद पार्टी के अंदर ही सियासी वबाल शुरू हो गया है.

पत्र में क्या लिखा था, राहुल गांधी क्यों हुए नाराज

पत्र में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए और कहा गया कि इस वक्त एक ऐसे अध्यक्ष की मांग है कि जो पूर्ण रूप से पार्टी को वक्त दे सके. सोमवार को हुई सीडब्लूसी की बैठक में इस चिट्ठी को लेकर काफी विवाद हुआ, सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी.

हालांकि, कई वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा करने से इनकार किया. साथ ही चिट्ठी लिखने वालों पर राहुल गांधी जमकर बरसे और उन्होंने इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े कर दिए. राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि चिट्ठी लिखने की टाइमिंग सही नहीं थी, क्योंकि इस वक्त पार्टी राजस्थान और मध्य प्रदेश में लड़ाई लड़ रही थी, साथ ही सोनिया गांधी भी बीमार थीं.

Posted By: Utpal kant

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