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Congress: जीएसटी में होने वाले बदलाव पर व्यापक चर्चा शुरू करे केंद्र

Updated at : 16 Aug 2025 5:40 PM (IST)
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Jairam Ramesh

Jairam Ramesh

जीएसटी दरों को व्यवहारिक बनाना जरूरी है, लेकिन राज्यों के हितों का भी ख्याल रखने की जरूरत है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी में व्यापक बदलाव करने की मांग करती रही है. लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी पार्टी ने जीएसटी को बेहतर बनाने का वादा किया था.

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Congress: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीएसटी में सुधार करने की घोषणा से महंगाई कम होने की संभावना है. इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री की घोषणा को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर आधिकारिक चर्चा पत्र जारी होना चाहिए ताकि इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श हो सके. जीएसटी दरों को व्यवहारिक बनाना जरूरी है, लेकिन राज्यों के हितों का भी ख्याल रखने की जरूरत है. 

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी में व्यापक बदलाव करने की मांग करती रही है. लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी पार्टी ने जीएसटी को बेहतर बनाने का वादा किया था. अब केंद्र सरकार को पता चला है कि जीएसटी को व्यवहारिक नहीं होगा तो निवेश और निजी उपभोग में वृद्धि नहीं होगी. निवेश और खपत को बढ़ाए बिना आर्थिक विकास नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि कर ढांचे का सरलीकरण होना समय की मांग है और इसके लिए जीएसटी की दरों को कम किया जाना चाहिए.

राज्यों के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहा है. ऐसे में जीएसटी को व्यवस्थित बनाए जाने के दौरान राज्यों के राजस्व को होने वाले नुकसान पर भी गौर करने की जरूरत है और ऐसे में उपकर क्षतिपूर्ति का समय सीमा को और बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि राज्यों के राजस्व को नुकसान नहीं हो. 

छोटे और लघु उद्योगों की समस्या दूर होना जरूरी

जयराम रमेश ने कहा कि रोजगार मुहैया कराने में छोटे और लघु उद्योगों की भूमिका काफी अधिक है. देश में मौजूदा समय में छोटे एवं लघु उद्योग कई तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं. ऐसे में जीएसटी में होने वाले बदलाव में इस क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है. कपड़ा, पर्यटन, निर्यातकों, हस्तशिल्प और कृषि जैसे क्षेत्रों में उभरे क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए.

राज्यों को राज्य स्तरीय जीएसटी लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि बिजली, शराब, पेट्रोलियम और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र भी जीएसटी के दायरे में आ जाएं. जीएसटी 2.0 को पूरी तरह से एक अच्छा और सरल बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा करने की जरूरत है. 


गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के अपने संबोधन में दिवाली से पहले जीएसटी की दरों को कम करने और इसे बेहतर बनाने की बात कही है. इस घोषणा के बाद चर्चा है कि अब जीएसटी के सिर्फ दो दर पांच और 12 फीसदी होंगे. अगर ऐसा होता है कि कई चीजें सस्ती हो सकती है. 

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Anjani Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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