Coal Ministry: कोयला क्षेत्र में सुधारों को लेकर हितधारकों की अहम बैठक 

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 07 Aug 2025 7:15 PM

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बैठक के दौरान उपस्थित हितधारकों ने स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, कोल गैसीफिकेशन को प्रोत्साहन देने, लॉजिस्टिक्स में सुधार, डिजिटल तकनीक को अपनाने और व्यवसाय सुगमता जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव रखे. मंत्रालय की ओर से इन सुझावों को भविष्य की नीति निर्माण में शामिल करने का आश्वासन दिया गया.

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Coal Ministry:कोयला क्षेत्र में सुधारों को लेकर लेकर कोयला मंत्रालय द्वारा गुरुवार को दिल्ली स्थित स्कोप कॉम्प्लेक्स में एक हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गयी. जिसका उद्देश्य कोयला क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर ऐसे नीतिगत सुधारों पर चर्चा करना था, जिससे घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाया जा सके. इसके साथ ही आयात पर निर्भरता कम हो और व्यवसाय करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके.

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की. इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, अपर सचिव श्रीमती रुपिंदर बरार, सनोज कुमार झा,  कोयला और लिग्नाइट पीएसयू के अध्यक्ष गण, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहें. कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पिछले एक दशक में कोयला क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में अस्पष्टता के युग से, देश पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही की ओर अग्रसर हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 और एक पारदर्शी नीलामी तंत्र को लागू करके इस क्षेत्र में आगामी सुधारों की नींव रखी.

कोयला क्षेत्र में एक दशक में हुआ बड़ा बदलाव

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने  कहा कि पिछले 10 वर्षों में कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी उन्नयन के कई कदम उठाए गए हैं. वर्ष 2015 में कोल माइंस (विशेष प्रावधान) अधिनियम के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया, जिससे कोयला ब्लॉक आवंटन में सुधार आया. उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा “डिजिटल निगरानी पोर्टल, गुणवत्ता नियंत्रण उपाय, वाणिज्यिक कोयला नीलामी, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम” और कोल गैसीफिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है. उन्होंने घरेलू उत्पादन में वृद्धि, कोयले के आयात को समाप्त करने और कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से सुधार प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की. वहीं  राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोयला देश की ऊर्जा सुरक्षा और विकास की रीढ़ है. इसलिए प्रत्येक निर्णय में  राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और हितधारकों को सहयोग की भावना के साथ कार्य करना चाहिए.

प्रगति के बावजूद और सुधार की आवश्यकता

कोयला मंत्रालय के सचिव  विक्रम देव दत्त ने कहा कि मंत्रालय ने पर्यावरण और वन मंजूरियों को सरल बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया है.उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम  में नए फीचर्स जोड़ने की जानकारी दी, जिससे परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी मिल सके. साथ ही उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राज्य सरकारों की भूमिका है, उन्हें नीति आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ताकि त्वरित समाधान निकाला जा सके. बैठक में मंत्रालय की ओर से यह भरोसा दिया गया कि हितधारकों हर सकारात्मक सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जायेगा. साथ ही निरंतर संवाद और भागीदारी की संस्कृति को भी और अधिक बढ़ावा दिया जायेगा.

बैठक के दौरान उपस्थित हितधारकों ने स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, कोल गैसीफिकेशन को प्रोत्साहन देने, लॉजिस्टिक्स में सुधार, डिजिटल तकनीक को अपनाने और व्यवसाय सुगमता जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव रखे. मंत्रालय की ओर से इन सुझावों को भविष्य की नीति निर्माण में शामिल करने का आश्वासन दिया गया. साथ ही मंत्रालय ने सुधारों को जारी रखने के साथ ही पारदर्शिता, दक्षता और स्थायित्व को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सुधारों को पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढाने की बात कही.

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