चीन के मांस बाजार से निकला है कोरोना, भारत में शाकाहार पर जोर देने की पीएम मोदी से अपील

Updated at : 25 Jun 2020 6:16 PM (IST)
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चीन के मांस बाजार से निकला है कोरोना, भारत में शाकाहार पर जोर देने की पीएम मोदी से अपील

कोविड-19 महामारी और पर्यावरण तथा जन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंताओं के बीच कुछ डॉक्टरों, कार्यकर्ताओं और पशु कल्याण समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शाकाहारी भोजन विकल्पों को बढ़ावा देने का अनुरोध किया है. इसके साथ ही मांस, अंडा तथा डेयरी उत्पादों का नियमन करने को भी कहा गया है .

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नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी और पर्यावरण तथा जन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंताओं के बीच कुछ डॉक्टरों, कार्यकर्ताओं और पशु कल्याण समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शाकाहारी भोजन विकल्पों को बढ़ावा देने का अनुरोध किया है. इसके साथ ही मांस, अंडा तथा डेयरी उत्पादों का नियमन करने को भी कहा गया है .

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कुछ डॉक्टरों के साथ कार्यकर्ताओं ने उल्लेख किया है कि चीन के वुहान में जीव-जंतुओं के मांस के बाजार से कोरोना वायरस फैला इसलिए भारत में भी मांस उत्पादन केंद्रों और बाजारों से ऐसा खतरा हो सकता है . पशु कल्याण संगठन पीपुल फॉर एनिमल्स (पीएफए), अहिंसा ट्रस्ट और मर्सी फॉर एनिमल्स (एमएफए) ने डॉक्टरों के आह्वान का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है .

इस पत्र में कहा गया है कि ‘ईट लांसेट’, विश्व आर्थिक मंच, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन समेत अन्य वैश्विक निकायों के अध्ययन से सामने आया है कि मांसाहारी भोजन के उत्पादन और उपभोग में वृद्धि से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गहरा असर पड़ रहा है . पीएफए की पशु कल्याण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने कहा, ‘‘चूंकि वुहान में मांस के बाजार से कोविड-19 का पता चला इसलिए भारत में भी मांस उत्पादन केंद्रों और बाजारों में इसी तरह की स्थिति हो सकती है .”

कई नामी और अग्रणी चिकित्सा पेशेवरों ने भी परामर्श जारी कर कहा है कि मांस, अंडा और डेयरी उत्पादों के उपभोग की तुलना में शाकाहारी भोजन ज्यादा सुरक्षित हैं . टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉ़ पंकज चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘अध्ययन से ऐसे कई प्रमाण मिले हैं कि विभिन्न किस्म के मांस के सेवन से टाइप-2 मधुमेह, हृदय रोग, हृदयाघात जैसी कई बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है . ” उन्होंने कहा कि मांस का उपभोग बढ़ने से पानी का इस्तेमाल भी बढ़ता है. वनों का कटाव होता है, जल प्रदूषित होता है और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है . कुल मिलाकर इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है.

Posted By – Pankaj kumar Pathak

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