अरुणाचल प्रदेश में चीन ने बढ़ाई पीएलए की गश्त, सेना के जवानों को टॉप क्लास की ट्रेनिंग दे रहे अफसर

पूर्वोत्तर में चीन की गतिविधियों की निगरानी करने वाले भारतीय सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सीमाई इलाकों में भारतीय सेना को चीन की सेना की गतिविधियों का पता चला है.
नई दिल्ली : पाकिस्तान की तरह चीन भी अपनी चालबाजी से बाज नहीं आ रहा है. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा विवाद खड़ा करने के बाद अब उसने अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों की गश्त तेज कर दी है. इतना ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश के सीमाई इलाके में उसके टॉप क्लास के अफसर अपने सैनिकों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.
मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की सेना पीएलए ने अरुणाचल के सीमाई इलाकों में अपने सैन्य अधिकारियों के दौरे को तेज कर दिया है. इसमें शामिल किए गए नए सैनिकों की निगरानी और उनके ओरिएंटेशन के लिए इन इलाकों में जवानों की गश्त को तेज कर दिया गया है.
पूर्वोत्तर में चीन की गतिविधियों की निगरानी करने वाले भारतीय सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सीमाई इलाकों में भारतीय सेना को चीन की सेना की गतिविधियों का पता चला है, उसमें लुंगरो ला, जिमीथांग और बुम ला शामिल है. सीमाई इलाके के ये सभी स्थान सामरिक दृष्टिकोण से अधिक महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, चीन किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने भी पूरी तैयार कर रखी है.
सीमाई इलाकों में लुंगरो ला क्षेत्र में चीन की ताजा गतिविधियों को संक्षेप में पेश करने के लिए भारतीय सेना की ओर से एक मैट्रिक्स तैयार किया गया है, जिसमें पीएलए ने जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 तक क्षेत्र में 90 गश्त की, जबकि जनवरी 2018 से दिसंबर 2019 तक यह आंकड़ा 40 था. चीनी सेना के गश्त की संख्या के दोगुने से अधिक होने के लिए सेना द्वारा करंट ऑपरेशनल सिचुएशन को जिम्मेदार ठहराया गया है.
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मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सीमाई इलाकों में तैनात अधिकारियों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश लुंगरो ला क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ दोनों ओर लंबी दूरी की गश्त की अवधि एक सप्ताह से चार सप्ताह तक हो सकती है. गतिविधि मैट्रिक्स शो के आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के बाद से वर्चस्व वाले इलाकों में चीन की सेना की गश्त बढ़ गई है.
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