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Budget 2024-25 Analysis: लोकलुभावन नहीं दूरदर्शी बजट

Updated at : 02 Feb 2024 4:42 PM (IST)
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Budget 2024-25 Analysis: लोकलुभावन नहीं दूरदर्शी बजट

Budget 2024-25 Analysis| सीमांत किसानों को खेती के अतिरिक्त भी काम चाहिए होता है, तो इसके लिए माइक्रो फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलना जरूरी है.

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ब्रजेश झा (प्रोफेसर, इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, दिल्ली) : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जो बजट पेश किया है, वह अंतरिम बजट है. अंतरिम बजट के हिसाब से यह बहुत लोकलुभावन नहीं है. इस बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना में राशि को बढ़ाया नहीं गया है. एमजी नरेगा के लिए भी बजट नहीं बढ़ाया गया है. यह एक दूरदर्शी बजट है, क्योंकि इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन, ग्रीन ग्रोथ को बढ़ावा देने की बातें कही गयी हैं.

कृषि क्षेत्र की बात करें, तो नैनो यूरिया की सफलता के बाद सरकार ने नैनो डीएपी के इस्तेमाल की बात कही है. दूसरी महत्वपूर्ण बात है आत्मनिर्भर तिहलन की घोषणा. पहले दलहन, तिलहन के लिए एमएसपी की बात नहीं होती थी. बहुत जगह किसान दलहन, तिहलन के लिए एमएसपी का लाभ नहीं उठा पाते थे. परंतु इस बार कहा गया है कि जब भी सरकार किसानों से तिलहन की खरीद करेगी, तो वह उसे एमएसपी देगी. किसानों के लिए यह बहुत सही कदम उठाया है सरकार ने. बजट में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग की भी बात की गयी है. हमारे यहां खेती में सीमांत किसानों की संख्या अधिक है. ऐसे किसानों को खेती के अतिरिक्त भी काम चाहिए होता है, तो इसके लिए माइक्रो फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलना जरूरी है, ताकि किसानों को गांव में या गांव के आसपास ही रोजगार मिल जाए. दुग्ध और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की बातें भी की है सरकार ने. इन क्षेत्रों में पहले से जो गतिविधियां और काम हो रहे थे, वे तो चलते ही रहेंगे. परंतु सरकार ने बजट के जरिये जो बहुत जरूरी बात की है, वह है मुंहपका और खुरपका रोग (माउथ एवं फुट डिजीज) के लिए टीकाकरण. देश में मुंहपका और खुरपका रोग से दुग्ध उत्पादन बहुत अधिक प्रभावित होता है. मत्स्य पालन की बात करें, तो बीते 10 वर्षों में इसे बहुत बढ़ावा दिया गया है. इस क्षेत्र को और विस्तारित करने के लिए पांच एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित किये जाने की भी बात कही गयी है.

बजट में लखपति दीदी को बढ़ावा देने की बात भी कही गयी है. लखपति दीदी मूल रूप से महिला स्वयं सहायता समूह है, जिसके लिए सरकार ने प्रतिवर्ष एक लाख रुपये के लाभ का लक्ष्य रखा है. इस समूह से असंख्य महिलाओं को लाभ मिलता है. सरकार ने बताया कि अब तक एक करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं. इस समूह से जुड़कर सीमांत किसान और उनके अतिरिक्त जो भी ग्रामीण हैं, यदि उनके पास जमीन नहीं भी है, तो भी वे अपना कुछ काम कर धन अर्जित कर सकती हैं. यह एक तरह का कुटीर उद्योग होता है, जिसमें हुनर की जरूरत होती है. इसमें मशीनों की आवश्यकता भी बहुत नहीं होती है.

वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण बात कही है. बीते सात-आठ वर्ष में इस योजना के तहत तीन करोड़ लोगों को आवास मिल चुका है, सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दो करोड़ आवास और तैयार करने का है. इससे जहां छोटे स्तर पर घर बनाने में जुटे मेहनतकश मजदूरों को पैसा मिलेगा, वहीं बेघरों को घर भी मिलेगा. बजट में लोकलुभावन चीजों को बढ़ावा नहीं देकर पहले से चल रहे विकास कार्यों को गति देने का काम किया गया है. कुल मिलाकर, यह एक सकारात्मक और दूरदर्शी बजट है. इससे कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा.

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