मंत्री भी, लाभार्थी भी! केंद्रीय मंत्री को अपने ही मंत्रालय की स्कीम से मिली 99 लाख की मदद
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी (Photo: X)
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राजस्थान में अपने खेती प्रोजेक्ट के लिए बागवानी योजना के तहत 99 लाख रुपये की सब्सिडी मंजूर हुई है. एक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है. जानें क्या पूरी जानकारी आई सामने.
राजस्थान के बीचों-बीच फैले एक बड़े फार्म में ऊंची पत्थर की दीवारें और कांटेदार तार लगे हैं. यहां बाग, कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हुए हैं. फार्म पर लगे एक बोर्ड पर साफ लिखा है कि इस परियोजना को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहायता मिली है. फार्म पर लगे बोर्ड के मुताबिक, इस परियोजना के लाभार्थी भागीरथ चौधरी हैं. बोर्ड पर यह भी लिखा है कि उन्हें राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत 50 प्रतिशत यानी 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है.
लेकिन इस बोर्ड पर एक अहम बात का जिक्र नहीं है. इसमें यह नहीं बताया गया कि लाभार्थी भागीरथ चौधरी सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री भी हैं. इस संबंध में द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर प्रकाशित की है जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं.
तीन महीने पहले 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को तीन महीने पहले 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी. रिपोर्ट के मुताबिक, यह सब्सिडी उसी मंत्रालय की एक योजना के तहत दी गई, जिसमें वह मंत्री हैं. इतना ही नहीं, जिस बोर्ड ने इस परियोजना को मंजूरी दी, उसके पदेन उपाध्यक्ष भी भागीरथ चौधरी ही हैं. यही बात अब विवाद की वजह बन गई है.
यह योजना बड़े पैमाने पर सब्जियों और फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी. इसे मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत 2014-15 में लॉन्च किया गया था. इस योजना का संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) करता है, जो कृषि मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है. मंत्रालय फिलहाल भागीरथ चौधरी के जिम्मे है.
भागीरथ चौधरी NHB बोर्ड के हैं उपाध्यक्ष
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की वेबसाइट के मुताबिक, इसकी गतिविधियों का संचालन एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स करता है. इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं. ऐसे में भागीरथ चौधरी इस बोर्ड के उपाध्यक्ष भी हैं. NHB की वेबसाइट पर पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर सिर्फ “कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री” का पद लिखा है. हालांकि, संपर्क के लिए जो ईमेल दिए गए हैं, वे सीधे भागीरथ चौधरी से जुड़े बताए गए हैं. इनमें एक सरकारी ईमेल आईडी और एक जीमेल पता शामिल है. इससे यह स्पष्ट होता है कि बोर्ड में उपाध्यक्ष की भूमिका फिलहाल भागीरथ चौधरी ही निभा रहे हैं.
सब्सिडी प्रस्तावों पर फैसला कौन लेता है?
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अन्य सदस्यों में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और बागवानी क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी व उद्योग प्रतिनिधि शामिल हैं. यही बोर्ड विभिन्न परियोजनाओं और सब्सिडी प्रस्तावों पर फैसला लेता है. कागजों के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना के तहत सब्सिडी वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने में कृषि राज्य मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती. अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की परियोजना अनुमोदन समिति देती है. इस समिति में बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते. ऐसे में तकनीकी रूप से परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया में मंत्री की सीधी भागीदारी नहीं मानी जाती.
इस मामले पर जवाब लेने के लिए द इंडियन एक्सप्रेस ने भागीरथ चौधरी को सवालों की एक सूची भेजी थी. उनसे पूछा गया था कि क्या अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत सब्सिडी लेना हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मामला माना जा सकता है. खबर प्रकाशित होने तक भागीरथ चौधरी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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