परिसीमन पर अमित शाह का भरोसा: दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम नहीं, बल्कि बढ़ेगा, 5 प्वाइंट्स में समझाया

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 16 Apr 2026 7:50 PM

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लोकसभा में अमित शाह, फोटो पीटीआई

Amit Shah On Delimitation: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम होने की आशंकाओं को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा - उनकी हिस्सेदारी कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी. उन्होंने विपक्ष के दावे को भ्रम फैलाने वाला बताया और 5 प्वाइंट्स में समझाया, दक्षिण के राज्यों को कैसे फायदा होगा.

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Amit Shah On Delimitation: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा- वह विधेयकों पर चर्चा का जवाब शुक्रवार को विस्तार से देंगे, लेकिन कुछ भ्रांतियों को अभी दूर करना चाहते हैं. उन्होंने इसे पांच प्वाइंट्स में समझाया.

  1. कर्नाटक में अभी 28 लोकसभा सीट हैं, जो कुल 543 सीट का 5.15 प्रतिशत है. बिल पास होने के बाद, कर्नाटक के सांसदों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी. जो कुल 816 सीटों का 5.14 प्रतिशत होगी. कर्नाटक को बिल्कुल भी कोई नुकसान नहीं होगा.
  2. शाह ने कहा कि आंध्र प्रदेश में अभी 25 लोकसभा सीट हैं और उसका प्रतिनिधित्व 4.6 प्रतिशत है जो परिसीमन के बाद 38 (4.65 प्रतिशत) हो जाएंगी.
  3. तेलंगाना में मौजूदा सीट की संख्या 17 (3.13 प्रतिशत) है, जो बाद में 26 (3.18 प्रतिशत) हो जाएंगी.
  4. शाह ने कहा, तमिलनाडु के 39 सदस्य (7.18 प्रतिशत) हैं जो परिसीमन के बाद 59 (7.23 प्रतिशत) हो जाएंगे.
  5. शाह ने कहा कि लोकसभा में अभी केरल के 20 सदस्य हैं. उनका प्रतिनिधित्व 3.38 प्रतिशत है जो बढ़कर 3.67 प्रतिशत (30 सीट) हो जाएगा.

परिसीमन के बाद दक्षिण का प्रतिनिधित्व बढ़कर 195 सीट हो जाएगा

अमित शाह ने कहा कि कुल मिलाकर अभी दक्षिणी राज्यों से 129 लोकसभा सदस्य आते हैं और उनका प्रतिनिधित्व 23.76 प्रतिशत है, जो 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद 195 सीट और 23.97 प्रतिशत, यानी 24 प्रतिशत हो जाएगा. शाह ने कहा, इसलिए प्रतिनिधित्व कम नहीं हो रहा, बढ़ रहा है.

शाह ने प्रियंका गांधी को दिया करारा जवाब

परिसीमन आयोग में पक्षपात की कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा की आशंकाओं पर शाह ने कहा, मैं प्रियंका जी से कहना चाहता हूं कि हमने परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई बदलाव नहीं किया है. पूरी तरह आपके कानून को रिपीट किया है. उन्होंने कहा, कांग्रेस की सरकार में इस अधिनियम का इस्तेमाल कर अगर हेरफेर की होगी तो मैं इतना कह सकता हूं कि हम नहीं करेंगे. और कुछ नहीं कह सकता.

2029 से पहले परिसीमन लागू नहीं होगा : शाह

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में फायदे के लिए इन विधेयकों को इस समय लाए जाने के आरोपों पर शाह ने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद की स्वीकृति और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगी. 2029 से पहले इसके लागू होने का सवाल नहीं है. तब तक सारे चुनाव पुरानी व्यवस्था से होंगे. उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्हें भी डरने की जरूरत नहीं है, हालांकि वह जीतेंगे नहीं, यह अलग बात है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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