भारत में वायु प्रदूषण से हो रही 1,16,000 शिशुओं की मौत, नई रिपोर्ट में और क्या पता चला

Updated at : 21 Oct 2020 1:08 PM (IST)
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भारत में वायु प्रदूषण से हो रही 1,16,000 शिशुओं की मौत, नई रिपोर्ट में और क्या पता चला

भारत में वायु प्रदूषण की वजह से प्रत्येक साल 1 लाख 16 हजार से ज्यादा नवजात बच्चों की मौत हो जाती है.

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नयी दिल्ली: सर्दियों की शुरुआत होते ही वायु प्रदूषण का मुद्दा गर्माने लगा है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पूरी सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का मुद्दा ज्वलंत रहता है. इस बीच एक रिपोर्ट आई है जो आंख खोलने वाली है. ये रिपोर्ट वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग में एक चेतावनी की तरह है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण की वजह से प्रत्येक साल 1 लाख 16 हजार से ज्यादा नवजात बच्चों की मौत हो जाती है. इनमें से हजारों बच्चे जन्म के 1 महीने के भीतर ही मर जाते हैं. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2020 में ये जानकारी सामने आई है.

वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं ये कारक

रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि इनमें से आधे से ज्यादा शिशुओं की मौत पीएम 2.5 से जुड़े वायु प्रदूषण कारकों से जुड़ी है. इनमें खाना पकाने का ईंधन, लकड़ी का कोयला, लड़की, गोबर जैसे ईंधन का मुख्य योगदान रहा है. इससे उत्पन्न वायु प्रदूषण की वजह से ज्यादा बच्चों की मौत हुई. वायु प्रदूषण की वजह से जान गंवाने वाले बच्चों में ये पाया गया कि या तो जन्म के बाद उनका वजन काफी कम था या फिर बच्चे प्रीमैच्योर पैदा हुए थे.

सोगा 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में वायु प्रदूषण मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह बन रहा है. वायु प्रदूषण काफी जोखिम पैदा कर रहा है.

वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियां

वायु प्रदूषण से शिशुओं की मौत से इतर भी काफी ज्यादा लोगों की मौत हुई है. 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के घरेलु और बाहरी कारकों की वजह से स्ट्रोक, हार्ट अटैक, शुगर, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़े से जुड़ी पुरानी बीमारी जैसे अस्थमा और टीबी की वजह से भी 10 लाख 67 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हर साल हुई है.

कोविड और वायु प्रदूषण का गहरा है नाता

वायु प्रदूषण के जोखिमों से जुड़ी ये रिपोर्ट बुधवार को प्रकाशित हुई. हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट ने ये रिपोर्ट प्रकाशित किया जो एक गैर लाभकारी अनुसंधान संस्थान है. ये संस्थान संयुक्त राज्य अमेरिका से संबंधित है. जानकारी के मुताबिक ये अध्ययन कोविड 19 महामारी के वक्त किया गया क्योंकि कोविड भी दिल और फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है. इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं. भारत में कोविड की वजह से अब तक 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि कोविड से मरने वाले अधिकांश लोग पहले से ही फेफड़ो या दिल संबंधी बीमारी से पीड़ित थी जिसकी वजह कहीं ना कहीं वायु प्रदूषण था.

वायु प्रदूषण, इससे होने वाली बीमारियां और कोविड का गहरा संबंध है. ये रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के कई देशों में सर्दियों का मौसम आने वाला है. सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है जिसकी वजह से आने वाले दो ढाई महीने में कोविड का खतरा भी बढ़ जाएगा क्योंकि ये महामारी की गंभीरता में एक कारक का काम करेगा.

‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान शुरू

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली प्रत्येक साल वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करता है. इस बार भी वायु प्रदूषण लोगों को परेशान करने लगा है. सरकार अपने तरीके से इसको रोकने के प्रयासों में लगी हैं. पानी का छिड़काव किया जा रहा है. इस बीच दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने लाल बत्ती ऑन, गाड़ी का इंजन ऑफ कैंपेन लांच किया है. इसके तहत लोगों के अपील की जा रही है कि जब वे लाल बत्ती में रूकें तो गाड़ी का इंजन बंद कर लें. इससे वायु प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है.

Posted By- Suraj Thakur

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