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न्याय के लिए ‘लड़ कर’ नजीर बन गयी निर्भया

Updated at : 06 May 2017 4:32 PM (IST)
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न्याय के लिए ‘लड़ कर’ नजीर बन गयी निर्भया

नयी दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में एक मेडिकल की छात्रा से गैंगरेप के मामले में फैसला आ चुका है. निर्भया के नाम से मशहूर हुई उस छात्रा के साथ बर्बर कृत्य करनेवाले एक नाबालिग को छोड़ कर सभी दोषियों को फांसी की सजा मिल चुकी है. इन सभी दोषियों को […]

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नयी दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में एक मेडिकल की छात्रा से गैंगरेप के मामले में फैसला आ चुका है. निर्भया के नाम से मशहूर हुई उस छात्रा के साथ बर्बर कृत्य करनेवाले एक नाबालिग को छोड़ कर सभी दोषियों को फांसी की सजा मिल चुकी है. इन सभी दोषियों को फांसी पर लटकाने कीतारीख तो मुकर्रर नहीं हुई है, लेकिन इतना तय हो गया है कि यदि पीड़ित व्यक्ति साहस दिखाये, तो उसे न्याय जरूर मिलता है. दोषियों को सजा जरूर मिलती है. न्याय के लिए लड़नेवाला नजीर बन जाता है.

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निर्भयाभी नजीर बन गयी. उसे यह मालूम नहीं था कि वह जीवित बचेगी या नहीं. लेकिन, उसने निश्चय कर लिया था कि उसके साथ बलात्कार करनेवालों को वह सजा दिला कर छोड़ेगी. मृत्युशैया पर लेटी निर्भया तब भी मानसिक रूप सेकितनी मजबूत थी, इसे बयां किया है किइसमामले को अंजाम तक पहुंचानेवाली तत्कालीन डीसीपी साउथ छाया शर्मा ने.

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जबछाया शर्मा निर्भया से मिलने सफदरजंग अस्पताल गयीं, तोउसने पुलिस अधिकारी से कहा था, ‘जिन लोगों ने मेरे साथ ये गंदा काम किया है, उन्हें छोड़ना मत.’ शुक्रवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों की फांसी कीसजा बरकरार रखी और कोई रियायत देने से इनकार कर दिया, तो छाया को निर्भया की याद आयी. उन्होंने मन ही मन निर्भया का धन्यवाद किया.

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यह निर्भया का साहस था कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस बना पायी. निर्भया एक साथ दो-दो संघर्ष किये. एक तो जीवन से लड़ रही थी, दूसरी तरफ अपने साथ गलत काम करनेवालों को सजा दिलाने के लिए लड़ रही थी. निर्भया ने इस स्थिति में भी कभी अपने बयान नहीं बदले.

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उसने सबसे पहले अस्पताल के डॉक्टर को अपना बयान दिया. इसके बाद एसडीएम और फिर जज के सामने. हर बार उसका बयान एक ही था. ऐसी छोटी-छोटी बातें भी बतायीं, जो पुलिस के लिए जांच में अहम साबित हुईं. हदसे के 13 दिन बाद निर्भया तो इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसके बयान को डाइंग डिक्लरेशन माना गया और कोर्ट ने सभी को फांसी की सजा सुना दी.

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http://www.prabhatkhabar.com/news/delhi/-2012-delhi-gang-rape–delhi–supreme-court-of-india/983239.html
फैसला सुनाते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि जो कुछ निर्भया के साथ हुआ, भयानक था. अक्सर देखा है कि बलात्कार पीड़ित घबरा जाते हैं. सच नहीं बताते या पूरा सच याद नहीं कर पाते, लेकिन इस लड़की का रवैया बड़ा सकारात्मक था. उसने पुलिस को यहां तक बताया कि बस की सीटें लाल रंग की थी और परदे पीले रंग के.पुलिसके लिए यही सबसे अहम सुराग साबित हुआ, जिसके आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सका.

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