परिवारवाद के सवाल पर अमित शाह का जवाब - क्या आप बता सकते हैं अगला बीजेपी अध्यक्ष कौन होगा?

Updated at : 30 Jan 2017 10:19 AM (IST)
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परिवारवाद के सवाल पर अमित शाह का जवाब - क्या आप बता सकते हैं अगला बीजेपी अध्यक्ष कौन होगा?

नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश में चुनावी तपिश के बीच अमित शाह ने नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी के साथ एक इंटरव्यू में बीजेपी के चुनावी रणनीति का खुलासा किया. पार्टी के घोषणापत्र जारी होने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का यह पहला इंटरव्यू है. परिवारवाद के सवाल का जवाब देते हुए […]

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नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश में चुनावी तपिश के बीच अमित शाह ने नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी के साथ एक इंटरव्यू में बीजेपी के चुनावी रणनीति का खुलासा किया. पार्टी के घोषणापत्र जारी होने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का यह पहला इंटरव्यू है. परिवारवाद के सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि भाजपा अब भी परिवारवाद से बची हुई पार्टी है. यहां आप यह नहीं बता सकते कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा. अमित शाह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश बाकी सारे नेताओं को दरकिनार कर मुख्यमंत्री बनते हैं, ये परिवारवाद है.

फारूक अब्दुल्ला जी के बाद इनके बेटे मुख्यमंत्री बनते हैं, ये परिवारवाद है. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी ये परिवारवाद है. किसी नेता का बच्चा चुनाव लड़ता है, वो एमएलए बनेगा, एमपी बनेगा, सालों तक काम करेगा मगर मुख्यमंत्री नहीं बन सकेगा, अगर उसमें काबिलियत नहीं है. ये केवल बीजेपी में देखने को मिलता है.

उन्होंने भाजपा का बचाव करते हुए कहा कि आप परिवारवाद की व्याख्या इतनी सरल मत कर दीजिए. देश में कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है. राहुल गांधी को अगर बेटा होता है या बेटी होती है तो इसमें कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है कि​ अगला कांग्रेस अध्यक्ष कौन होगा. क्‍या आप बता सकते हैं कि​ बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? ये अंत​र है बीजेपी और बाकी परिवारवादी पार्टियों के बीच में. एक आदमी गरीब घर से उठकर देश का प्रधानमंत्री बन जाता है, मेरे जैसा बूथ कार्यकर्ता बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाए, ऐसी पार्टी में कभी भी परिवारवाद नहीं आ सकता.

नेटवर्क 18 को दिये इंटरव्यू में उन्होंने संप्रदायिक ध्रुवीकरण पर लग रहे आरोप का जवाब देते हुए कहा कि इस मामले को इस तरह से देखा नहीं जाना चाहिए. यूपी के साथ एक विशेष प्रकार की परिस्थिति​ है. यहां बहुत बड़ा आक्रोश है, जिस तरह से वोटबैंक, तुष्टिकरण की राजनीति​ हुई, इसके खिलाफ अगर कोई कुछ बोलता है तो वह जनता की आवाज उठाता है. मगर, सांप्रदायिक प्रचार नहीं करना चाहिए. सांप्रदायिक चीजों को एजेंडा नहीं बनाना चाहिए. हम इस बात को मानते हैं, लेकिन अगर कोई हमारी ओर से कत्लखाने पर उठाए गए कदम को सांप्रदायिक कहता है, तो वो जान ले कि ये किसानों की भलाई के लिए उठाया गया कदम है.

​कैराना में हुए हिंदुओं के पलायन को लेकर अमित शाह ने कहा कि पश्चिमी यूपी में जो पलायन होता है अगर हम उसके लिए टास्क फोर्स बनाते हैं, अगर कोई इसे सांप्रदायिक कहता है तो ये उन्हें जानना चाहिए ​कि ये उत्तर प्रदेश की जनता की भलाई के लिए है. कोई बच्चियों को प्रताड़ित करे,​ जिसके चलते वो स्कूल कॉलेज नहीं जा पाती हैं. इसके खिलाफ अगर बीजेपी एंटी रोमि​यो स्क्वॉड बनाती है, तो सांप्रदायिक बात नहीं है, ये छात्राओं का अधिकार है

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