LPG संकट होगा खत्म? मुंद्रा पोर्ट पहुंचा विशाल टैंकर शिवालिक, कल हो सकती है नंदा देवी की एंट्री
Published by : Pritish Sahay Updated At : 16 Mar 2026 6:28 PM
मुंद्रा पोर्ट पहुंचा टैंकर शिवालिक, फोटो- पीटीआई
Shivalik Ship Reaches Mundra Port: होर्मुज में तनाव के एलपीजी से लदा जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया है. इसमें 45 हजार मीट्रिक टन एलपीजी है. कल यानी 17 मार्च को एक और जहाज नंदा देवी कांडला में लंगर डाल सकता है.
Shivalik Ship Reaches Mundra Port: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया है. यह जहाज युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलकर भारत पहुंचा है. टैंकर में 45 हजार मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लदी हुई है, जिससे देश में गैस आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित है. ऐसे में शिवालिक का सकुशल भारत पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है. वहीं एक अन्य जहाज नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर लंगर डाल सकता है. ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे.
81000 टन क्रूड ऑयल लेकर भारत आ रहा जहाज जग लाडकी
क्रूड ऑयल को लेकर भी भारत के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी करीब 81,000 टन मुरबान क्रूड ऑयल लेकर सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है. भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि यह जहाज 14 मार्च को यूएई से रवाना हुआ था और अनुमान है कि यह 17 मार्च को मुंद्रा पोर्ट पहुंच सकता है.
फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में फंसे हैं कई भारतीय जहाज
मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ इजराइल और अमेरिका के बीच जारी जंग का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात पर पड़ा है. जंग के कारण कई जहाज इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में फंस गए हैं. भारत सरकार ने कहा है कि इस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और समुद्री परिचालन पर लगातार करीबी नजर रखी जा रही है. फिलहाल, फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वजवाहक जहाज मौजूद हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं.
भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी की जरूरतें आयात पर निर्भर करता है. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले और उसके जवाब में ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से अधिक कच्चा तेल, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85 से 90 प्रतिशत एलपीजी आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से होता था. इस लड़ाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया, जो खाड़ी देशों से भारत तक ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य मार्ग है. हालांकि, भारत ने रूस और अन्य स्रोतों से तेल मंगाकर कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार किया है, लेकिन इसके बावजूद औद्योगिक ग्राहकों को गैस की आपूर्ति कम कर दी गई है. होटल और रेसटोरेंट के लिए भी एलपीजी की मात्रा सीमित कर दी गई है. (इनपुट भाषा)
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By Pritish Sahay
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