गुमशुदा जेएनयू छात्र मामला : अदालत ने लगायी पुलिस को फटकार
Updated at : 09 Dec 2016 8:13 PM (IST)
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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के लापता होने के बारे में सुराग नहीं जुटा पाने के लिए पुलिस को आज फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि कैसे कोई व्यक्ति अचानक गायब हो सकता है. नजीब का पिछले 55 दिनों से पता नहीं चल पाया है. अदालत ने […]
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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के लापता होने के बारे में सुराग नहीं जुटा पाने के लिए पुलिस को आज फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि कैसे कोई व्यक्ति अचानक गायब हो सकता है. नजीब का पिछले 55 दिनों से पता नहीं चल पाया है.
अदालत ने कहा कि उसकी चिंता लडके की बरामदगी को लेकर है, जिसकी मां अपने बेटे का पता लगाने के लिए दर-दर भटक रही है.
अदालत ने कहा कि एक व्यक्ति के 50 से अधिक दिनों से लापता होने से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होगी. न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कहा, ‘‘50 दिन से अधिक बीत गए हैं. अब भी आप उसके पता ठिकाने के बारे में नहीं जानते हैं. कैसे कोई अचानक गायब हो सकता है और पुलिस को उसके बारे में कुछ पता नहीं है. नजीब जेएनयू के माही-मांडवी हॉस्टल से 15 अक्तूबर को उसके और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ सदस्यों के बीच झगडा होने के बाद से कैंपस से लापता हो गया। एबीवीपी ने उसकी गुमशुदगी में अपनी संलिप्तता से इंकार किया है.
पीठ ने कहा, ‘‘हम झगडे को लेकर चिंतित नहीं हैं. हम सिर्फ यह चाहते हैं कि लडका बरामद हो और वह अपने घर लौटे। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मां को उसका बच्चा मिले।” अदालत की मौखिक टिप्पणी तब आई जब पुलिस और जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय :जेएनयू: ने उसे सूचित किया कि नजीब का आज तक पता नहीं चला है और वे उसका पता लगाने के लिए सारे प्रयास कर रहे हैं.
विश्वविद्यालय और पुलिस नजीब की 45 वर्षीय मां फातिमा नफीस द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जवाब दे रही थी, जो आज अदालत में मौजूद थीं. उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की है कि वे उनके 27 वर्षीय बेटे का पता लगाएं, जो जेएनयू में जैव प्रौद्योगिकी में एमएससी की पढाई कर रहा था.
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