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क्या खत्म हो गई है नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच की दूरियां ?

Updated at : 01 Dec 2016 9:46 AM (IST)
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क्या खत्म हो गई है नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच की दूरियां ?

नयी दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी और उनके कट्टर विरोधी माने जाने वाले संजय जोशी के बीच की तल्खी किसी से छिपी नहीं है लेकिन, मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो जोशी अब मोदी को चाहने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. ‘जी हां’ यानी जोशी भी मोदी के ‘फैन’ हो […]

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नयी दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी और उनके कट्टर विरोधी माने जाने वाले संजय जोशी के बीच की तल्खी किसी से छिपी नहीं है लेकिन, मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो जोशी अब मोदी को चाहने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. ‘जी हां’ यानी जोशी भी मोदी के ‘फैन’ हो गए हैं.

इस संबंध में आज टाइम्स ग्रुप ने खबर दी है. खबर में कहा गया है कि भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री संजय जोशी अब पीएम मोदी से काफी प्रभावित हैं और उनके फैन हो गए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और फिर नोटबंदी से जुड़े मोदी के फैसलों का जोशी स्वागत कर चुके हैं और इन मुद्दों पर वे सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की जमकर तारीफ कर चुके हैं. जोशी के रुख में यह बदलाव आजकल चर्चा का विषय बन चुका है.

खबर के अनुसार जोशी के सार्वजनिक तौर पर मोदी की कई बार तारीफ करने के बाद उनके भाजपा में वापसी के कयासों को जोर मिलता दिख रहा है. जोशी के एक समर्थक ने अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के क्रम में कहा कि हालांकि उन्होंने (जोशी) हमसे कुछ कहा नहीं है, लेकिन वह नियमित तौर पर पीएम की कोशिशों की तारीफ कर रहे हैं और आलाकमान के कानों तक यह बात पहुंच चुकी है.

जोशी समर्थक ने कहा कि वह पार्टी में नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. दोनों ही नेताओं का संघ पूरा समर्थन करता है. अगर पार्टी का वर्तमान नेतृत्व जोशी को कोई अहम जिम्मेदारी देता है तो इससे भाजपा को गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों में लाभ मिलेगा.

यहां उल्लेख करते चलें कि नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच की तल्खी करीब दो दशक पुरानी है. मोदी ने जब 2001 में गुजरात के सीएम का पद संभाला था इससे पहले जोशी का लंबे वक्त तक गुजरात भाजपा पर नियंत्रण था. मोदी का भाजपा में कद बढ़ने के साथ-साथ जोशी धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए. 2014 आम चुनाव से पहले, जोशी को राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया गया था, लेकिन उन्हें कुछ ही दिन बाद इस पद से हटा दिया गया. हालांकि, जोशी के समर्थक अब भी गुजरात और राष्ट्रीय भाजपा में हैं जो समय-समय पर उनके समर्थन में पोस्टर बाजी करते नजर आ जाते हैं.

गौरतलब है कि मोदी और जोशी, दोनों ने ही अपने करियर की शुरुआत आरएसएस प्रचारक के तौर पर की थी. बाद में इनको भाजपा में अहम जिम्मेदारी मिली. दोनों ने ही गुजरात में भाजपा को खड़ा करने और फिर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई.

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