एनडीटीवी इंडिया के एक दिन का प्रसारण रोकने का फैसला स्थगित

Published at :07 Nov 2016 7:57 PM (IST)
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एनडीटीवी इंडिया के एक दिन का प्रसारण रोकने का फैसला स्थगित

नयी दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी समाचार चैनल एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन का प्रतिबंध लगाने का फैसला ‘‘स्थगित’ करने का निर्णय किया है. ऐसा चैनल के फैसले की समीक्षा का अनुरोध करने के बाद किया गया. अधिकारियों ने कहा कि अपील का निपटारा होने तक फैसले को स्थगित कर दिया गया. […]

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नयी दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी समाचार चैनल एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन का प्रतिबंध लगाने का फैसला ‘‘स्थगित’ करने का निर्णय किया है. ऐसा चैनल के फैसले की समीक्षा का अनुरोध करने के बाद किया गया. अधिकारियों ने कहा कि अपील का निपटारा होने तक फैसले को स्थगित कर दिया गया.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एनडीटीवी के सह-प्रमुख प्रणय रॉय आज सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू से मिले और आदेश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की. सूत्रों ने बताया कि राय ने दंड लगाने के अंतर मंत्रालयी समिति के फैसले की तरफ इशारा करते हुए दावा किया कि इसे लेकर एनडीटीवी के नजरिये को ‘‘शायद पूरी तरह एवं पर्याप्त रुप से नहीं देखा गया.’

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘रॉय ने फैसले की समीक्षा की मांग की और कहा कि तब तक आदेश को स्थगित कर देना चाहिए.’ अधिकारियों ने कहा कि नायडू ने उनका अनुरोध मान लिया और मंत्रालय फैसले की समीक्षा करेगा और तब तक के लिए आदेश स्थगित कर दिया गया.

ऐसी जानकारी मिली है कि नायडू ने कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा मीडिया संगठनों के लिए कई परामर्श जारी करने के बाद पिछले साल आतंक रोधी अभियानों की मीडिया कवरेज से संबंधित नियम छह (एक) (पी) को जोड़ा गया था. उन्होंने कहा कि आतंक रोधी अभियानों की कवरेज से संबंधित नियमों के उल्लंघन के मामले देखे गए. मंत्रालय ने गत दो नवंबर को पठानकोट आतंकी हमले की कवरेज में दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए एनडीटीवी इंडिया का एक दिन का प्रसारण रोकने का आदेश दिया था.

किसने क्‍या कहा था

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जद (यू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव, द्रमुक प्रमुख एम करणानिधि, बसपा प्रमुख मायावती और राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने ‘प्रतिबंध’ को अभिव्यक्ति की आजादी का अपमान बताया और इसे वापस लेने की मांग की थी. माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा था कि यह मोदी सरकार के ‘निरंकुश’ रवैये को दर्शाता है.

करणानिधि ने कहा था, ‘‘अगर केंद्र सरकार इस तरह की गतिविधियां जारी रखती है तो यह दूसरे आपातकाल की ओर ले जाएगा और वो काले दिन लोगों के दिमाग पर अंकित हो जाएंगे .’ उन्होंने आपातकाल के दिनों की याद दिलाई जब पार्टी मुखपत्र ‘मुरासोली’ में उनके लेखों को तब प्रतिबंधित कर दिया गया था.

लालू प्रसाद ने कहा था कि सरकार की कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है. लालू ने कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस इस देश को आपातकाल और तानाशाही की ओर ले जा रही है.’

* चैनल ने रखा था अपना पक्ष और सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट की ली शरण

एनडीटीवी इंडिया ने इस मामले में अपना पक्षा रखा था. चैनल ने कहा था कि सभी समाचार चैनलों व अखबारों की खबरें एक जैसी थी, वास्तविकता में हमारा कवरेज विशेष रूप से संतुलित था. पठानकोट आतंकी हमले के कवरेज को लेकर सरकार की ओर से प्रसारण पर नौ नवंबर को एक दिन के लिए लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ चैनल ने आज उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. शेयर बाजारों को भेजी सूचना में चैनल ने कहा है कि याचिका में सरकारी आदेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है

शेयर बाजारों को भेजी सूचना में एनडीटीवी ने कहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उसके हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया पर नौ नवंबर, 2016 की रात बारह बजकर एक मिनट से लेकर 10 नवंबर, 2016 की रात बारह बजकर एक मिनट तक, एक दिन के प्रसारण या पुन: प्रसारण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है. कंपनी की ओर से कहा गया है, ‘‘एनडीटीवी लिमिटेड और अन्य ने इस आदेश के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की है, इसके साथ ही आदेश की संवैधानिक वैधता तथा उस कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है जिसके तहत इस आशय का आदेश जारी किया गया है.’

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