CBI ने एंब्रायर सौदे में NRI शस्त्र विक्रेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Oct 2016 6:18 PM

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नयी दिल्ली : सीबीआई ने वर्ष 2008 में एंब्रायर कंपनी के साथ तीन विमानों के सौदे के सिलसिले में कथित तौर पर 57 लाख डॉलर से ज्यादा की रिश्वत लेने के मामले में एनआरआई शस्त्र विक्रेता विपिन खन्ना और दो विदेशी कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. सीबीआई के सूत्रों ने आज कहा कि […]

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नयी दिल्ली : सीबीआई ने वर्ष 2008 में एंब्रायर कंपनी के साथ तीन विमानों के सौदे के सिलसिले में कथित तौर पर 57 लाख डॉलर से ज्यादा की रिश्वत लेने के मामले में एनआरआई शस्त्र विक्रेता विपिन खन्ना और दो विदेशी कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. सीबीआई के सूत्रों ने आज कहा कि कुल 20.8 करोड डॉलर के सौदे के सिलसिले में खन्ना के साथ ब्राजील की एंब्रायर और सिंगापुर की इंटरडेव प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. खन्ना का नाम पहले भी रक्षा सौदों में आया था, जिनकी जांच एजेंसी ने की. आरोप है कि इंटरडेव के जरिये एंब्रायर की सहयोगी कंपनियों से कथित तौर पर खन्ना को रिश्वत पहुंचाई गयी.

सूत्रों ने कहा कि एजेंसी ने कल यहां कई स्थानों पर तलाशी ली थी। अभियान देर शाम तक जारी रहा. दक्षिण अफ्रीकी कंपनी डेनेल से जुड़े हथियार सौदे के मामले में भी खन्ना पर सीबीआई जांच चली थी. बाद में इस मामले में एजेंसी को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी पडी क्योंकि विदेश से पर्याप्त सबूत नहीं मिल सके. खन्ना ने इस्राइल के साथ बराक मिसाइल सौदे और पाकिस्तान को हथियारों की बिक्री के मामले में भी सीबीआई जांच का सामना किया था. खन्ना को कांग्रेस के एक पूर्व नेता का रिश्तेदार माना जाता है.

सूत्रों ने यह भी कहा कि आरोप है कि एंब्रायर सौदे में ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के रास्ते कमीशन दिया गया. उन्होंने कहा कि सितंबर में एजेंसी ने प्रारंभिक जांच शुरू की थी. उसने इसे 18 अक्तूबर को नियमित प्राथमिकी में तब्दील कर लिया क्योंकि उसे मामले में आगे बढने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री मिल गयी. इस सौदे में शामिल तीन विमानों का इस्तेमाल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को हवाई रडार प्रणाली के लिए करना था. एंब्रायर के साथ यह सौदा वर्ष 2008 में हुआ था.

ब्राजील के एक अखबार ने आरोप लगाया था कि विमानन कंपनी ने सौदा पाने के लिए सउदी अरब और भारत में सौदों के लिए बिचौलियों की मदद ली थी. भारत में रक्षा खरीद नियमों के अनुसार, ऐसे सौदों से बिचौलियों को सख्ती से दूर रखा जाता है. ब्राजील के प्रमुख अखबार ‘फोल्हा डे साओ पाउलो’ ने खबर प्रकाशित की थी कि कंपनी ने भारत के साथ सौदे को अंतिम रूप देने के लिए ब्रिटेन में रहने वाले रक्षा एजेंट को कथित तौर पर कमीशन दी थी. डीआरडीओ ने वर्ष 2008 में कंपनी से तीन विमान खरीदे थे और उन्हें वायु रडार प्रणाली के रूप में तैयार किया था.

भारतीय वायु सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार इस प्रणाली को एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम या अवाक्स कहा जाता है. रिपोर्ट में कहा गया कि यह कंपनी वर्ष 2010 से अमेरिकी न्याय विभाग की जांच के दायरे में है. तब डोमिनिकन गणराज्य के साथ हुए एक अनुबंध ने अमेरिका के संदेह को बढ़ा दिया था. उसके बाद से जांच के दायरे को विस्तार देते हुए आठ अन्य देशों के साथ सौदों को शामिल कर लिया गया. प्रारंभिक जांच के पंजीकरण के बाद एंब्रायर ने एक बयान जारी करते हुए कहा था, ‘वर्ष 2011 से एंब्रायर ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा है कि वह व्यापक आंतरिक जांच कर रहा है और एफसीपीए के कथित उल्लंघनों की जांच में अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है.’

बयान में कहा गया था, ‘कंपनी ने स्वेच्छा से जांच का दायरा बढाया और मामले की प्रगति की जानकारी बाजार को व्यवस्थापूर्ण ढंग से देना शुरू किया.’ इसमें कहा गया, ‘कंपनी ब्राजील में कानूनी कार्रवाई का पक्ष नहीं है. इसलिए उसमें निहित जानकारी तक उसकी पहुंच नहीं है.’

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