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भारत के विरोध के बाद अलग-थलग पड़ा पाकिस्‍तान, SAARC सम्‍मेलन रद्द !

Updated at : 28 Sep 2016 5:01 PM (IST)
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भारत के विरोध के बाद अलग-थलग पड़ा पाकिस्‍तान, SAARC सम्‍मेलन रद्द !

नयी दिल्‍ली : उरी हमले के बाद दुनिया भर में आतंकवाद को लेकर किरकिरी का सामना कर रहे पाकिस्‍तान को एक और बड़ा झटका लगा है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसी साल इस्‍लामाबाद में 8 और 9 नवंबर हो होने वाला सार्क सम्‍मेलन रद्द हो गया है. इधर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता […]

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नयी दिल्‍ली : उरी हमले के बाद दुनिया भर में आतंकवाद को लेकर किरकिरी का सामना कर रहे पाकिस्‍तान को एक और बड़ा झटका लगा है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसी साल इस्‍लामाबाद में 8 और 9 नवंबर हो होने वाला सार्क सम्‍मेलन रद्द हो गया है. इधर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्‍वरुप ने भी सार्क सम्मेलन रद्द होने की खबर क‍ो सही बताया. उन्‍होंने कहा, सार्क सम्‍मेलन टाल दिया गया है क्योंकि 4 देशों ने इस्लामाबाद में इस सम्मेलन में जाने से इनकार कर दिया है. रद्द करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है.

उन्‍होंने कहा, सार्क का नियम है कि अगर किसी भी राष्ट्राध्यक्ष ने इसमें न जाने के फैसला किया है तो यह टल जाता है. हालांकि, औपचारिक घोषणा सिर्फ नेपाल ही कर सकता है. स्‍वरुप ने कहा, दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान उस राह पर बरकरार है जिससे यह मौजूदा फैसला लिया गया है.

* नेपाली मीडिया ने की रद्द होने की पुष्टि

नेपाली मीडिया का कहना है कि ‘‘मौजूदा परिस्थितियों’ में भारत द्वारा दक्षेस सम्मेलन में भाग नहीं लेने के फैसले के कारण इसे स्थगित कर दिया गया. इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान को करनी थी.

काठमांडो पोस्ट की खबर के अनुसार, ‘‘भारत द्वारा ‘मौजूदा परिस्थितियों’ में 19वें दक्षेस सम्मेलन में भाग लेने में कल अक्षमता जताए जाने के बाद, इसे स्थगित कर दिया गया है.’ दक्षेस के संबंध में नेपाली मीडिया में आ रही खबरें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस आठ सदस्यीय समूह का वर्तमान अध्यक्ष नेपाल है.

भारत ने अपने फैसले से नेपाल को अवगत करा दिया है. दक्षेस सम्मेलन में यदि एक भी सदस्य भाग लेने में असमर्थ हो तो सम्मेलन स्वभाविक रुप से रद्द या स्थगित हो जाता है. हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह अभी तक इसकी पुष्टि नहीं कर सकता है कि दक्षेस सम्मेलन रद्द कर दिया गया है.

जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले में सेना के 18 सैनिकों के मारे जाने के बाद से ही भारत-पाकिस्तान के बीच स्थिति तनावपूर्ण है. भारत के अलावा दक्षेस के तीन अन्य सदस्यों… बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फैसला किया है. उन्होंने अप्रत्यक्ष रुप से पाकिस्तान को ‘‘ऐसा वातावरण बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है जिसमें सफल सम्मेलन का आयोजन नहीं हो सकता.’ 1985 में गठित दक्षेस में वर्तमान में आठ सदस्य हैं… अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका.

गौरतलब हो कि उरी हमले के बाद जारी तनाव के बाद भारत ने सार्क सम्‍मेलन में हिस्‍सा नहीं लेने का कल देर रात फैसला लिया. भारत के बहिष्‍कार के बाद तीन और देशों ने (भूटान,अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश) भी सार्क सम्‍मेलन में हिस्‍सा नहीं लेने का फैसला लिया. आठ देशों के समूह में कोई एक देश भी अगर बहिष्‍कार करता है तो सम्‍मेलन नहीं हो सकता है. वैसे में भारत सहित चार देशों के पीछे हटने के बाद सार्क सम्‍मेलन का रद्द होना तय था.

भारत ने मंगलवार की रात कहा कि एक देश ने ऐसा माहौल बना दिया है, जो शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के अनुकूल नहीं है. भारत ने दक्षेस के मौजूदा अध्यक्ष नेपाल को अवगत करा दिया है. इसमें कहा गया है कि मौजूदा परिदृश्य में भारत सरकार इसलामाबाद में प्रस्तावित सम्मेलन में शामिल होने में असमर्थ है. सम्मेलन आगामी नवंबर महीने में इसलामाबाद में होना था. इस बीच पाकिस्तान ने दक्षेस शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेने के भारत के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.

भारत के साथ ही बांग्लादेश और भूटान ने भी नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है और कहा है कि बैठक को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए माहौल सही नहीं है. बांग्लादेश और भूटान ने भी अपने फैसले से दक्षेस अध्यक्ष नेपाल को अवगत करा दिया. बांग्लादेश द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘‘बांग्लादेश के अंदरुनी मामलों में एक देश के बढते हस्तक्षेप ने ऐसा माहौल उत्पन्न कर दिया है जो नवंबर 2016 में इस्लामाबाद में 19वें दक्षेस शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उपयुक्त नहीं है.’ इसने कहा, ‘‘दक्षेस प्रक्रिया के आरंभकर्ता के रुप में बांग्लादेश क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी और संपर्कों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अटल है, लेकिन उसका मानना है कि ये चीजें एक सुखद माहौल में ही आगे बढ़ सकती हैं. उपरोक्त के मद्देनजर बांग्लादेश इस्लामाबाद में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन में भाग लेने में असमर्थ है.’

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