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उत्तराखंड में जारी रहेगा राष्‍ट्रपति शासन, सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

Updated at : 22 Apr 2016 7:57 AM (IST)
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उत्तराखंड में जारी रहेगा राष्‍ट्रपति शासन, सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

नयी दिल्ली : उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी. एटॉनी जनरल ने इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति शासन पर रोक हटाने का आदेश तबतक स्थगित कर देना चाहिए, जबतक […]

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नयी दिल्ली : उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी. एटॉनी जनरल ने इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति शासन पर रोक हटाने का आदेश तबतक स्थगित कर देना चाहिए, जबतक हमें हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिलती. केंद्र सरकार ने लिखित आदेश के बगैर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट की बैठक पर आपत्ति जतायी. उत्तराखंड सरकार ने इस बैठक में 11 अहम फैसले लिये थे.

पत्रकारों से बातचीत के दौरान एटॉनी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, दोनों पक्षों को सुनकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लिया है कि अभी वहां राष्ट्रपति शासन रहेगा. उत्तराखंड हाईकोर्ट का लिखित आदेश 26 तारीख तक सभी पार्टी को दिया जायेगा. इसके बाद इस मामले पर 27 तारीख को सुनवाई होगी.

केंद्र ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन खारिज करने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए आज उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था .महाधिवक्ता मुकुल रस्तोगी ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा एवं न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र किया था . पीठ ने महाधिवक्ता से मामले को आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की खातिर रजिस्टरी से संपर्क करने को कहा, सुनवाई के लिए आज अपराह्न 3.30 बजे का समय दिया गया था सुनवाई के दौरान केंद्र ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक की मांग की है. एटॉर्नी जनरल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अबतक इस फैसले की कॉपी हमें नहीं मिली है. उन्होंने कैबिनेट की बैठक और फैसले पर भी सवाल खड़े किये.

पीठ ने कहा कि रजिस्टरी याचिका को एक उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर से अनुमति लेगी.महाधिवक्ता ने शुरुआत में कहा कि विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) आज सुबह दायर कर दी गयी है लेकिन ‘‘हमारे पास फैसले की प्रति नहीं है’ क्योंकि लिखित फैसला उपलब्ध नहीं है और केवल मौखिक फैसला सुनाया गया था.

प्रधान न्यायाधीश राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों के पूर्व निर्धारित सम्मेलन में भाग ले रहे थे। इसलिए प्रधान न्यायाधीश की अदालत में न्यायमूर्ति मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ बैठी थी.

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश की गैर मौजूदगी के कारण इस मामले को सूचीबद्ध कराने के लिए कुछ प्रबंध करने होंगे. महाधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि आज और सोमवार के बीच स्पष्ट रूप से समस्या पैदा होने की आशंका है. रोहतगी ने कहा, ‘‘मैं आज ही रोक लगाए जाने पर जोर देना चाहता हूं.’ कांग्रेस के उन नौ विद्रोही विधायकों ने भी याचिका दायर की जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्य करार दे दिया था. उन्होंने 29 अप्रैल को सदन में शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया से उन्हें दूर रखने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है. महाधिवक्ता के साथ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह एवं तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे भी थे। महाधिवक्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय के कल सुनाये गये फैसले को चुनौती देने के लिए आज सुबह एसएलपी दायर की गयी.

कांग्रेस पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा मौजूद हुए.उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 356 के तहत 27 मार्च को की गयी घोषणा के लिए केंद्र से नाराजगी जताते हुए उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को कल निरस्त कर दिया और हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया। अदालत ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को उखाडने के लिए केंद्र को फटकार लगाई थी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि राष्ट्रपति शासन लगाना उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है.रावत सरकार की बहाली का आदेश देते हुए अदालत ने कहा था कि अपदस्थ मुख्यमंत्री को अनिवार्य रुप से 29 अप्रैल को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करना होगा.

हरीश रावत ने कहा हम उच्चतम न्यायलय के फैसले का सम्मान करते हैं

उच्चतम न्यायलय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि यह अंतरिम आदेश है. जब तक अंतिम निर्णय नहीं आयेंगे हम हर तरह के परिवर्तन के लिए तैयार रहेंगे. इस फैसले के बाद 27 तारीख तक कम-से-कम राष्ट्रपति शासन हटाया नहीं जा सकता है. हम यह चाहते है कि मेरिट पर इस मामले का निर्णय हो जायें . इस तरह की राजनीतिक अस्थिरता से राज्य का विकास प्रभावित हो रहा है. राज्य के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं. पेयजल संकट का सामना करना पड़ा है. बजट का पैसा खर्च नहीं हो पाया . इस समय एक पूर्व मुख्यमंत्री होते हुए मैं यही कहना चाहूंगा कि जल्द राजनीतिक स्थिरता सही है.

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