ग्रीनपीस ने किया डब्ल्यूटीओ विवाद में खिलाफ भारत के रुख का समर्थन

नयीदिल्ली : प्रमुख गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने सौर उर्जा उपकरण बाजार को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के फैसले को चुनौती देने के भारत सरकार केरुख का समर्थन करते हुए कहा है कि डब्ल्यूटीओ का फैसला पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते की भावना का ‘उल्लंघन’ करता है. भारत के खिलाफ फैसला देते हुए डब्ल्यूटीओ ने […]
नयीदिल्ली : प्रमुख गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने सौर उर्जा उपकरण बाजार को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के फैसले को चुनौती देने के भारत सरकार केरुख का समर्थन करते हुए कहा है कि डब्ल्यूटीओ का फैसला पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते की भावना का ‘उल्लंघन’ करता है.
भारत के खिलाफ फैसला देते हुए डब्ल्यूटीओ ने हाल ही में सौर उर्जा कंपनियों के साथ सरकार के बिजली खरीद समझौतों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के ‘विरद्ध’ बताया है जिसमें कंपनियों को परियोजना के लिए उपकरणों की खरीद में घरेलू उपकरणों को तरजीह देने की शर्त शामिल.
अमेरिका ने इस शर्त को अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण बताते हुए इसकी डब्ल्यूटीओमें शिकायत की थी. डब्ल्यूटीओ का निर्णय भारत के महत्वाकांक्षी स्वच्छ उर्जा कार्यक्रम के लिए झटका माना जा रहा है. भारत सरकार ने उसके इस फैसले को चुनौती देने का निर्णय किया है. ग्रीनपीस इंडिया व ग्रीनपीस यूएसए :अमेरिका: ने डब्ल्यूटीओ के फैसले की आलोचना की है और इसके खिलाफ अपील करने के भारत सरकार के फैसले के प्रति समर्थन जताया है.
ग्रीनपीस इंडिया से जुड़ी पुजारिनी सेन ने कहा,‘ भारत की घरेलू सामग्री के इस्तेमाल की शर्त :डीसीआर: व्यवस्था इस उपयुक्त आधारभूत सिद्धांत पर आधारित है कि – जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में शामिल होने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आर्थिक अवसर बढाए जाएंगे और हरित रोजगार सृजित किये जाएंगे. ‘ उन्होंने कहा,‘ यह बेतुका है कि डब्ल्यूटीओ ने इस सिद्धांत को नहीं समझा और इस तरह के इस फैसले ने इस तरह की अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणालियों से विकासशील देशों को संभावित खतरे की ओर संकेत किया है. ‘
सेन ने डब्ल्यूटीओ की व्यवस्था को भारत की नवीकरणीय उर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए झटका करार दिया है. अमेरिका 2014 में भारत के खिलाफ इस मुद्दे को डब्ल्यूटीओ में ले गया था.
भारत ने 2022 तक 175000 मेगावाट नवीकरणीय उर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और डब्ल्यूटीओ के फैसले को इसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
ग्रीनपीस ने इसके साथ ही अमेरिका का आह्वान किया है कि वह इस मामले में अपने घोषित रवैये पर कायम रहे.
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