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‘निर्भया'' की मां बोलीं, मेरी बेटी का नाम ज्योति था, नाम लेने में कोई शर्म नहीं

Updated at : 16 Dec 2015 9:34 PM (IST)
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‘निर्भया'' की मां बोलीं, मेरी बेटी का नाम ज्योति था, नाम लेने में कोई शर्म नहीं

नयी दिल्ली : पूरे देश और दुनिया को दहला देने वाले 16 दिसंबर सामूहिक दुष्कर्म कांड की पीड़िता की मां ने आज अपनी बेटी को साहसिक श्रद्धांजलि देते हुए उसका नाम सार्वजनिक रुप से लिया और कहा कि बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वाले लोगों को अपने सिर शर्म से झुकाने चाहिए, न कि पीड़ितों […]

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नयी दिल्ली : पूरे देश और दुनिया को दहला देने वाले 16 दिसंबर सामूहिक दुष्कर्म कांड की पीड़िता की मां ने आज अपनी बेटी को साहसिक श्रद्धांजलि देते हुए उसका नाम सार्वजनिक रुप से लिया और कहा कि बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वाले लोगों को अपने सिर शर्म से झुकाने चाहिए, न कि पीड़ितों या उनके परिवारों को.

तीन साल पहले 16 दिसंबर की रात को 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ जघन्य तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और 13 दिन बाद लड़की की मृत्यु हो गयी थी. इस घटना से पूरे देश में आक्रोश की लहर फैल गयी थी. देश की जनता ने उसे ‘निर्भया’ नाम देकर श्रद्धांजलि दी. इस घटना के तीन साल पूरे होने पर पीड़िता की मां आशा देवी ने अत्यंत साहस दिखाते हुए अपनी बेटी का नाम सार्वजनिक रुप से लिया.
घटना की बरसी मनाने के लिए जंतर मंतर पर महिलाओं और नागरिकों के संगठनों द्वारा आयोजित सार्वजनिक समारोह ‘निर्भया चेतना दिवस’ के मौके पर पीड़िता की मां ने कहा, ‘‘मेरी बेटी का नाम ज्योति सिंह था और मुझे उसका नाम लेने में कोई शर्म नहीं लगती. बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वालों को अपने सिर शर्म से झुकाने चाहिए, न कि पीड़िताओं या उनके परिवारों को. आपको भी उसका नाम लेना चाहिए.’
लड़की की मां आशा के साथ पिता बद्री सिंह पांडेय ने घटना को अंजाम देने वाले छह अपराधियों में से कथित रुप से सबसे नृशंस तरीके से अपराध को अंजाम देने वाले किशोर दोषी को रिहा नहीं किये जाने की मांग की और कहा कि वह शहर के लिए खतरा है. किशोर अपराधी को 20 दिसंबर को रिहा किया जाना है.
आशा ने कहा, ‘‘हमारी बेटी की तीसरी पुण्यतिथि पर हम देख रहे हैं कि किशोर दोषी को छोड़ा जा रहा है. इसमें क्या न्याय हुआ? मुझे नहीं पता कि वह 16 साल का था या 18 का. मुझे केवल इतना पता है कि उसने जघन्य अपराध किया और सजा के लिए कोई आयुसीमा नहीं होनी चाहिए.’
आशा देवी ने सार्वजनिक मंच से चार मांगें और उठाईं जिनमें किशोर दोषी समेत पांच आरोपियों को मौत की सजा सुनाई जानी चाहिए, बलात्कार पीड़िताओं को जल्द न्याय दिलाने के लिए सभी अदालतों में फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित की जानी चाहिए, किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन किये जाएं और निर्भया कोष का इस्तेमाल सभी राज्यों में उच्च गुणवत्ता वाली फोरेंसिक प्रयोगशालाएं बनाने में किया जाए.
छात्रा को श्रद्धांजलि देने के लिए जंतर-मंतर पर जावेद अख्तर और शबाना आजमी जैसी हस्तियों के साथ दिल्ली कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी आदि लोग जमा हुए और कई महिला संगठनों ने भी मौजदूगी दर्ज कराई. घटना के बाद जंतर-मंतर एक तरह से लडकी के स्मारक के रुप में तब्दील हो गया था और आज भी उसकी याद में कैंडल लाइट मार्च निकाले गये, प्रार्थना सभाएं आयोजित की गयीं और कई अन्य आयोजन भी हुए.
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