मूर्ति विसर्जन मामला : वाराणसी में कर्फ्यू हटा, हालात पर काबू पाने के लिए बुलायी गयी फोर्स
Updated at : 05 Oct 2015 7:25 PM (IST)
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वाराणसी : वाराणसी के चार थाना क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रण करने के लिए लगा कर्फ्यू हटा लिया गया है. फिलहाल स्थिति काबू में है. पिछले दिनों साधु सन्यासियों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में आज अन्याय प्रतिकार यात्रा निकाली गयी थी यात्रा 3 किमी ही चल पायी थी कि भीड़ उग्र हो गयी. […]
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वाराणसी : वाराणसी के चार थाना क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रण करने के लिए लगा कर्फ्यू हटा लिया गया है. फिलहाल स्थिति काबू में है. पिछले दिनों साधु सन्यासियों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में आज अन्याय प्रतिकार यात्रा निकाली गयी थी यात्रा 3 किमी ही चल पायी थी कि भीड़ उग्र हो गयी. उग्र होती भीड़ को रोकने के लिएपुलिस कोएक बार फिर लाठीचार्ज करना पड़ा. गुस्सायी भीड़ ने कई दुकान और वाहनों को आग के हवाले कर दिया. भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया जवाब में पुलिस ने भी पथराव किया.
Varanasi Ganesha idol immersion issue: Protesters set vehicles on fire, police lathi charge protesters pic.twitter.com/1iXXo5cmnj
— ANI (@ANI_news) October 5, 2015
इस हिंसा में लगभग आधा दर्जन पुलिस वालों के घायल होने की खबर है. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इसमें कई लोगों को भी चोट आयी है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भीड़ उसी जगह उग्र हुई जहां पिछले बार साधु संतों पर लाठी चार्ज किया गया था. वाराणसी में 4 थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया था. पुलिस प्रशासन को एहतियातन यह फैसला लेना पड़ा है. अन्याय प्रतिकार यात्रा में भाग लेने के लिए कांग्रेस , भाजपा समेत कई पार्टियों के नेता पहुंचे थे.
Varanasi Ganesha idol immersion issue: Protesters set vehicles on fire. pic.twitter.com/2qCtiCokGA
— ANI (@ANI_news) October 5, 2015
इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश भर से साधु संतों का जमावड़ा लगा था. विश्व हिन्दु परिषद भी इस यात्रा के समर्थन में उतरा था.रैली में भाग लेने के लिए चक्रपाणि महाराज, विहिप नेता साध्वी प्राची व अयोध्या समेत कई शहरों से लगभग 50 हजार साधु संत मौजूद थे. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी की थी लेकिन अचानक भीड़ के उग्र होने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी.
जानिये क्या है पूरा मामला
गणेश भक्त पूजा के बाद मुर्ति विसर्जन के लिए घाट पहुंचे वहां उन्हें विसर्जन करने से रोक दिया गया इसके पीछे पुलिस ने तर्क दिया कि गंगा की सफाई का अभियान चल रहा है ऐसे में विसर्जन से पानी दुषित हो जायेगा. विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का भी आश्वासन दिया गया. प्रशासनिक अधिकारी बार- बार गंगा में विसर्जन ना करने देने को लेकर अड़े रहे. मराठा गणेशोत्सव समिति के सदस्य जब विसर्जन के लिए पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया. पुलिस ने साधु संतो के साथ जैसा बर्ताव किया उसकी एक वीडियो क्लीप भी सोशल मीडिया में खूब वायरल हुई. 3.48 सेंकेंड के इस वीडियो में पुलिस का बर्बर चेहरा सामने आया. प्रशासन विसर्जन न करने देने पर अड़ा था गंगा में विसर्जन के अलावा कोई वैकल्पिक सुविधा भी नहीं जुड़ी थी.
कई साधु संत हुए थे घायल
पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज में कई साधु संत घायल हो गये थे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी घायल हो गये. उन्हें तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया. इतना ही नहीं पुलिस ने साधु संत से मिलने आने वालों को भी रोकने की कोशिश की थी. इससे भक्तों और समर्थकों में गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया था.
साधु संतों ने त्याग दिया था अन्न जल
नाराज साधु संतो ने अस्पताल में अन्न जल त्याग दिया था. उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी. कई साधु संतो ने अपने घाव मीडिया के सामने दिखाये थे जिसमें डंडों के निशान उनकी पीठ पर साफ नजर आ रहे थे. इसके बाद कई राजनीतिक दलों के नेता भी साधु संतों का हाल पूछने अस्पताल पहुंचे. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने भी लाठीचार्ज को हिंदुओं पर जुल्म की संज्ञा देते हुए उसी वक्त कहा था कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लाठी चार्ज के विरोध में विश्व हिंदु परिषद, बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी ने बनारस बंद का एलान कर दिया था.
सोशल मीडिया पर विशेष नजर
उत्तर प्रदेश समेत इस वक्त कई राज्यों में हालात बेहद नाजुक हैं. ऐसे में प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि किसी भी तरह का अफवाह ना फेले जिससे हिंसा और भड़के फिलहाल वाराणसी के कई क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में बतायी जा रही है. कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने पूरी घटना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा, कुछ असामाजिक तत्वों ने शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. शहरवासियों से किसी भी प्रकार की अफवाहों में न आने की अपील की है, फिलहाल, स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है, कमिश्नर ने कहा सोशल मीडिया, वेबसाइट, व्हॉट्सएप और फेसबुक पर भी प्रशासन की विशेष नजर है.
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