गुरदासपुर हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ, सरकार के पास पुख्ता सबूत

Updated at : 26 Aug 2015 9:50 PM (IST)
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गुरदासपुर हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ, सरकार के पास पुख्ता सबूत

नयी दिल्ली : गुरदासपुर आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वाले तीन आतंकवादी पाकिस्तान के सरगोदा से आये थे और मारे गये आतंकवादियों से मिले एक जोड़ी जूते पर चीता ब्रांड का निशान मिला है जो पाकिस्तान का प्रसिद्ध ब्रांड है. भारत ने एनएसए स्तर की होने वाली बातचीत, जो अब रद्द हो चुकी है, में […]

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नयी दिल्ली : गुरदासपुर आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वाले तीन आतंकवादी पाकिस्तान के सरगोदा से आये थे और मारे गये आतंकवादियों से मिले एक जोड़ी जूते पर चीता ब्रांड का निशान मिला है जो पाकिस्तान का प्रसिद्ध ब्रांड है.

भारत ने एनएसए स्तर की होने वाली बातचीत, जो अब रद्द हो चुकी है, में पाकिस्तान को सौंपने के लिए जो दस्तावेज तैयार किया था, उसके अनुसार स्वतंत्र विशेषज्ञों ने मारे गये आतंकवादियों के पास से मिले दो जीपीएस उपकरणों का विश्लेषण किया. आतंकवादियों ने 27 जुलाई को गुरदासपुर में हमलों को अंजाम दिया था जिनमें सात लोग मारे गये.
विशेषज्ञों को पता चला कि 21 जुलाई को जीपीएस के दिशा सूचकांक से इनके पाकिस्तान के सरगोदा के पास शाहपुर-साहीवाल रोड के नजदीक केनाल रोड पर होने का पता चला. दस्तावेज के मुताबिक विशेषज्ञों ने अंतत: निष्कर्ष निकाला कि जीपीएस-2 भी पाकिस्तान के अंदर मौजूदगी की बात बयां करता है.
मारे गये आतंकवादियों में से एक के जूते के अंदर के सोल पर चीता ब्रांड का निशान मिला है. ब्रांड के नाम को छिपाने के लिए अन्य दो जोड़ी जूतों को खरोंच दिया गया और स्याही से छिपाने की कोशिश की गयी. चीता ब्रांड के जूते भारत में नहीं मिलते लेकिन पाकिस्तान में यह मशहूर ब्रांड है.
जांच अधिकारियों को पता चला है कि पाकिस्तान के तीनों आतंकवादी गुरदासपुर जिले में नारोत जैमाल सिंह थाने के अंतर्गत आने वाले गांव मस्तगढ के करीब ताश के पास रावी नदी पार करके भारत आये थे. मारे गये आतंकवादियों का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के एक बोर्ड ने किया था. उनमें से किसी के कपडे पर कोई लेबल-टैग नहीं मिला. उन्हें पहचान छिपाने के लिए जानबूझकर हटा दिया गया था. केवल एक आतंकवादी के दस्ताने पर मेड इन पाकिस्तान का टैग देखा गया.
गुरदासपुर के हमलावरों के पास से मिले रॉकेट लांचर पर यूगोस्लाविया-चेक गणराज्य के निशान थे वहीं उनके पास से मिले कारतूसों के फोरेंसिक विश्लेषण से उनके चीन, रुस, यूक्रेन और चेक गणराज्य से होने का पता चला. तीनों आतंकवादियों के पास से मिली एक-56 राइफलों से निशान हटा दिये गये थे, लेकिन फोरेंसिक विश्लेषण में उनकी डिजाइन चीनी होने का पता चला.
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