सुषमा ने तीन बार कहा, अगर वार्ता होगी, तो सिर्फ आतंकवाद पर होगी, अन्यथा नहीं होगी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Aug 2015 4:07 PM
नयी दिल्ली :विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज भारत-पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तरीय वार्ता पर पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि उसके साथ अगर वार्ता होगी तो सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर होगी, नहीं तो बात नहीं होगी. सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी एनएसए सरताज अजीज द्वारा कथित तौर पर […]
नयी दिल्ली :विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज भारत-पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तरीय वार्ता पर पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि उसके साथ अगर वार्ता होगी तो सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर होगी, नहीं तो बात नहीं होगी. सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी एनएसए सरताज अजीज द्वारा कथित तौर पर रॉ संबंधी दस्तावजे प्रेस कान्फ्रेंस में लहाराये जाने के मुद्दे पर कहा कि डोजियर प्रेस कान्फ्रेंस में लहराये नहीं जाते, बल्कि बंद लिफाफे में बातचीत के टेबल पर दिये जाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान हमें डोजियर देगा, तो हम उसे जीवित सबूत देंगे. सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि उफा में तीन स्तरों पर वार्ता करने की बात तय हुई थी और उस समझौते पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने समझौता किया था. एक डीजी बीएसफ स्तर की, दूसरी एनएसए स्तर की और तीसरी डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन) स्तर की. पर, पाकिस्तान ने इन वार्ताओं की तारीख देने के मामलों को लटकाया. सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान को शुरू से ही बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढाने का मन नहीं था.
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाली एनएसए स्तर की वार्ता के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि इस वार्ता में आतंकवाद के अतिरिक्त अन्य किसी मुद्दे पर बात नहीं होगी. साथ ही विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि वार्ता भारत और पाकिस्तान के बीच होगी, इसमें हुर्रियत या अन्य कोई शामिल नहीं होगा. चूंकि वार्ता दोनों देशों के बीच होने वालीहै,इसलिए वार्ता या तो भारत में होगी या पाकिस्तान में. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ होने वाली हर बातचीत वार्ता नहीं है. लेकिन 1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे उस वक्त वार्ता की शुरुआत हुई थी. इसमें आठ मामले शामिल हैं और हर मामले को कौन देखेंगे यह भी तय है.
लेकिन अटल जी ने वार्ता की कोशिश की और उन्हें कारगिल का युद्ध मिला. 2004-2005 में वार्ता हुई और विदेश मंत्रियों ने समीक्षा भी की. लेकिन फिर मुंबई हमला हो गया. 2010 में फिर बातचीत शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसे रिज्यूम डॉयलॉग का नाम दिया गया. लेकिन उफा में जो समझौता हुआ वह ना तो कंपोजिट डॉयलॉग था और ना रिज्यूम डॉयलॉग . वहां जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले, तो यह तय हुआ कि हम पहले आतंकवाद पर बात कर लें और फिर सीमा पर शांति के लिए बात करें.
इसमें तीन बातचीत होनी थी. तीनों मीटिंग का स्तर और विषय तय था. एनएसए स्तर की मीटिंग का विषय आतंकवाद था और अन्य दोनों मीटिंग का विषय सीमा पर शांति थी. 10 जुलाई को उफा की बैठक हुई थी और 23 जुलाई को हमने पाकिस्तान को यह सूचना दे दी थी कि 23 अगस्त को एनएसए स्तर की वार्ता होनी है, लेकिन इसका जवाब हमें 14 अगस्त को मिला, जिसमें आतंकवाद के अतिरिक्त भी विषय शामिल हैं. सच्चाई यह है कि उफा समझौते के बाद जब नवाज शरीफ स्वदेश लौटे तो उनकी वहां निंदा होने लगी. इसलिए वे इस प्रयास में जुट गये कि एनएसए स्तर की बातचीत ना हो. उफा के बाद 91 वें बार पाकिस्तान ने सीज फायर का उल्लंघन किया. हमपर काफी दबाव था, लेकिन हमने बातचीत को रद्द करने का फैसला नहीं किया. इस बातचीत में अन्य मुद्दे जुड़ सकते हैं, लेकिन वे सिर्फ आतंकवाद से जुड़े होने चाहिए. इस बातचीत में आतंकवाद के अलावा और कोई मुद्दा जुड़ ही नहीं सकता.
मैं सरताज अजीज को यह बताना चाहती हूं कि भारत वार्ता से नहीं भाग रहा है. भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता में दोनों देश शामिल होंगे और तीसरा कोई नहीं होगा. हुर्रियत और अन्य कोई इस बातचीत में शामिल नहीं होगा.जिस तरह हमने अपने घरेलू दबाव को झेलकर इस वार्ता को आयोजित करने का प्रयास किया है, उसी तरह आप अपने देश के दबाव को झेलकर वार्ता करें. इस वार्ता का विषय आतंकवाद होगा और हम इसमें किसी मध्यस्थ को स्वीकार नहीं करेंगे. अगर पाकिस्तान आतंकवाद पर वार्ता करना चाहता है, तो सरताज अजीज का स्वागत है.
सुषमा स्वराज ने कहा सरताज साहब अगर बातचीत के लिए तैयार हैं, तो वे आयें हम स्वागत के लिए तैयार हैं. लेकिन आतंकवाद के अतिरिक्त अन्य किसी मुद्दे पर बात नहीं होगी और ना ही कोई पक्षकार होगा. भारत वार्ता चाहता है, हम कोई शर्त नहीं लगा रहे. मैं सरताज अजीज से कह रही हूं कि शिमला समझौते का सम्मान करें और भारत आयें. सरताज अजीज ने मुझसे जो सवाल पूछे मैंने उनका जवाब दे दिया है. अगर वे बातचीत करना चाहते हैं, तो सिर्फ आज की रात है, उनके पास जवाब देने के लिए. सुषमा स्वराज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सरताज अजीज शिमला समझौते और उफा समझौते के तहत बातचीत करेंगे, तो वार्ता होगी अन्यथा नहीं होगी
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह साफ हो जायेगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तरीय वार्ता का भविष्य क्या होगा. यह वार्ता कल होनी है. इस वार्ता से पहले आज पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा है कि कश्मीर मसले पर बातचीत के बिना वार्ता का कोई मतलब नहीं है.
EAM Sushma Swaraj to address media on India-Pakistan NSA Talks shortly pic.twitter.com/5Tpphp36Qz
— ANI (@ANI) August 22, 2015
अजीज ने कहा कि हम उफा समझौते के तहत वार्ता को तैयार हैं, जिसमें यह कहा गया था कि दोनों देश सभी मसले पर बात करेंगे. वे यह कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर का जिक्र समझौते में नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि वार्ता में यह मुद्दा शामिल नहीं होगा.
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