स्वतंत्रता दिवस पर मोदी-ओबामा की दोस्ती छुएगी आसमान

Published at :09 Aug 2015 11:31 AM (IST)
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स्वतंत्रता दिवस पर मोदी-ओबामा की दोस्ती छुएगी आसमान

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की दोस्ती इस बार स्वतंत्रता दिवस पर नए आयाम छूने जा रही है. स्वतंत्रता दिवस पर देश में पतंगें उडाने की परंपरा है और इस बार इस परंपरा में मोदी और ओबामा की दोस्ती भी एक नया रंग भर रही है और दोनों नेताओं […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की दोस्ती इस बार स्वतंत्रता दिवस पर नए आयाम छूने जा रही है. स्वतंत्रता दिवस पर देश में पतंगें उडाने की परंपरा है और इस बार इस परंपरा में मोदी और ओबामा की दोस्ती भी एक नया रंग भर रही है और दोनों नेताओं के चित्रों वाली पतंगें उडती नजर आने लगी हैं. इस बार बाजार में मोदी और ओबामा के चित्रों वाली पतंगों की काफी मांग है. उनके साथ बॉलीवुड अभिनेता सलमान, शाहरुख, अमिताभ, करीना सहित फिल्मी और टीवी की दुनिया के कई कलाकार भी होंगे. लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आसमान में उडती पतंगों में नजर नहीं आ रहे हैं. यहां के दुकानदारों ने बताया कि इस बार अबतक केजरीवाल की पतंग आई ही नहीं है. बाजार में मोदी की दो तरह की पतंगें हैं, एक में उनकी अकेले की फोटो है जिस पर लिखा है ‘‘महानायक’’ और किनारे लिखा है ‘‘अच्छे दिन’’. इसके अलावा मोदी ओबामा दोनों की फोटो एक ही पतंग पर भी है.

पुरानी दिल्ली के लालकुआं इलाके में हर साल कई राज्यों के पतंग व्यापारी पतंगों की दुकान लगाते हैं और इस बार भी यह बाजार राजनेताओं, कलाकारों और काटरूनों की रंग बिरंगी पतंगों से अटा पडा है. राजधानी के कई हिस्सों से लोग आजादी का जश्न मानने के लिए पतंग और मांझा खरीदने के लिए इस बाजार का रुख कर रहे हैं. राजधानी में बरसों से 15 अगस्त के मौके पर दिनभर पतंगबाजी होती है और हर उम्र के लोग पतंगबाजी का लुफ्त उठाते हैं. आरिफ पतंग सेंटर के मोहम्मद आरिफ ने बताया कि ग्राहक मोदी, सलमान, पीकू, दीपिका पाडुकोण, कैटरीना कैफ, करीना कपूर, छोटा भीम, बालवीर की पतंगे ले रहे हैं. एक अन्य दुकानदार ने बताया कि अध्धी, तैता और पौनी साइज की पतंगों की ज्यादा मांग है. 40 वर्ग इंच की पतंग जिसका नाम ‘तावा’ है उसे भी कुछ लोग खरीद रहे हैं. तिरंगे की पतंगों को भी लोग पसंद कर रहे हैं.

पतंगों को उडानों के लिए मांझा और सद्दी का इस्तेमाल किया जाता है और जिसका मांझा जितना तेज होगा उतनी पतंगों को काट सकेगा. पहले सिर्फ बरेली के मांङो की मांग थी, लेकिन अब चीन का मांझा भी बाजार में है. हालांकि इस पर प्रतिबंध है लेकिन यह आसानी से मिल जाएगा। यह देसी मांझे से अच्छा और सस्ता है. एक अन्य दुकानदार नवेद ने बताया कि मांझा बरेली का मशहूर है लेकिन चीनी मांङो ने इसके बाजार को कम कर दिया है. उन्होंने बताया कि चीनी मांझा प्लास्टिक का है तथा सस्ता है और गुणवत्ता में बेरली के मांझे से अच्छा है. इसकी खासियत यह है कि इससे पतंग उडाने के लिए सद्दी का इस्तेमाल नहीं करना होगा. नवेद ने बताया कि चीनी मांझे की तीन रील की चरखी (एक रील में करीब 900 मीटर) 170 रुपये की आ जाती है जबकि भारतीय मांझे की 350 से 400 रुपये में मिलती है. इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस पर प्रतिबंध है फिर भी मिल रहा है.

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