शूचिता प्रभावित करने वाले वायदों से बचें पार्टियां : चुनाव आयोग

नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों द्वारा घोषणापत्र में किये गये वादों को पूरा नहीं करने के संबंध में कार्रवाई करने का उसके पास कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आयोग द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि राजनीतिक दलों को ऐसे वादों […]
नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों द्वारा घोषणापत्र में किये गये वादों को पूरा नहीं करने के संबंध में कार्रवाई करने का उसके पास कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आयोग द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि राजनीतिक दलों को ऐसे वादों से बचना चाहिए, जो चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को प्रभावित करते हों.
मतदाताओं पर न डालें अनावश्यक प्रभाव
चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में नागरिकों के लिए कल्याण योजनाएं बनाने की बात कही गयी है. इसलिए घोषणापत्र में वायदे करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन, ऐसे वायदे करने से बचा जाना चाहिए, जो मतदाताओं पर अनावश्यक प्रभाव डालते हैं.
बैठक में उभरी राय
दलों में मतभेद
कुछ राजनीतिक दल ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने के विचार से सहमत थे.
कुछ दलों का मानना था कि स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीति में घोषणापत्र में वादे करना उनका अधिकार और कर्तव्य है.
आयोग की राय
आयोग ने सिद्धांतिक रूप में माना कि घोषणापत्र तैयार करना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन वे स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव कराने एवं सभी राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने पर ऐसे अव्यावहारिक वादों के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकते.
राजनीतिक दलों से उम्मीद की जाती है कि उनके घोषणापत्र में किये गये वायदों की तार्किकता स्पष्ट हो. मतदाताओं का विश्वास तभी कायम रखा जा सकता है, जब वादे पूरे होंगे.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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