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पाकिस्तानी फौजी ने कहा, ''हां'' हमने मारा कैप्टन कालिया को...

Updated at : 01 Jun 2015 12:02 PM (IST)
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पाकिस्तानी फौजी ने कहा, ''हां'' हमने मारा कैप्टन कालिया को...

नयी दिल्ली : कारगिल युद्ध में शहीद हुए सौरभ कालिया और पांच अन्य भारतीय जवानों को न्याय नहीं दिला पाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना हो रही है.सरकार की ओर से कहा गया है कि इसे अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं उठाया जाएगा. इस संबंध में एक अंगरेजी दैनिक ने खबर प्रकाशित की है. […]

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नयी दिल्ली : कारगिल युद्ध में शहीद हुए सौरभ कालिया और पांच अन्य भारतीय जवानों को न्याय नहीं दिला पाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना हो रही है.सरकार की ओर से कहा गया है कि इसे अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं उठाया जाएगा. इस संबंध में एक अंगरेजी दैनिक ने खबर प्रकाशित की है.

वहीं दूसरी ओर, कैप्टन कालिया को मारने वाले पाकिस्तानी फौजी ने कहा है कि हां हमने कैप्टन कालिया को मारा है. इस संबंध में यू ट्यूब में एक वीडियो वायरल है जिसमें यह पाकिस्तानी फौजी कारगिल युद्ध का उल्लेख कर रहा है. पाकिस्तानी फौजी ने एक टीवी शो में कहा कि हिंदुस्तानी सेना के जवान शिकार करने के लिए आए थे और खुद शिकार हो बन गये.

उल्लेखनीय है कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान 4 जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया के साथ पांच अन्य भारतीय जवानों की हत्या पाकिस्तानी सैनिकों के द्वारा कर दी गयी थी. पहले पाकिस्तानी सैनिकों ने इन्हें बंधक बनाया फिर इनके साथ अमानवीय व्यवहार किया.

युद्ध के बाद जब इनके शव को भारत लाया गया तो इनके शव को देखकर देश दहल गया और पाकिस्तान विरोधी आवाजें उठने लगी. इन शहीदों का परिवार आज तक पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है लेकिन इसका सकारात्मक जवाब उन्हें नहीं मिल रहा है.

यह मुद्दा जब पिछले दिनों सदन में उठा तो सरकार ने अपने जवाब में कहा कि इस मामले से न्यूयॉर्क अधिवेशन के दौरान 22 सितंबर 1999 को और मानवाधिकार आयोग को अप्रैल 2000 में ही अवगत करा दिया गया है. अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के जरिए कानूनी कार्रवाई के बारे में भी सारे पहलुओं पर ध्‍यान दिया गया लेकिन यह संभव होता नहीं दिख रहा है.

आपको बता दें कि 4 जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया ने ही सबसे पहले कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की जानकारी दी थी. उन्हें पांच जवानों के साथ 15 मई 1999 को पाकिस्तानी सेना द्वारा पकड़ लिया गया था जिसके बाद उनपर काफी अमानवीय व्यवहार किया गया. पाकिस्तानी सेना ने 6 जून 1999 को भारत की सेना को पार्थिव शरीर लौटाया था. इनके शरीर पर चोट के काफी निशान थे.

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