एम्स सीवीसी विवाद : क्या मोदी से झूठ बोलते हैं उनके मंत्री, नेता व अफसर?

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की थी कि न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा. पर, जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे आमलोगों में यह संदेश जा रहा है कि कहीं मोदी के मंत्री, नेता व अफसर तो उनसे झूठ नहीं बोल रहे हैं? एम्स के मुख्य सतर्कता […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की थी कि न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा. पर, जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे आमलोगों में यह संदेश जा रहा है कि कहीं मोदी के मंत्री, नेता व अफसर तो उनसे झूठ नहीं बोल रहे हैं? एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को जब कुछ महीने पूर्व स्वास्थ्य मंत्रलय ने पद से हटा दिया तो देश में काफी हंगमा बरपा था. मीडिया ने इसे मुद्दा बनाया था, लेकिन बाद में यह कहा गया कि चूंकि चतुर्वेदी इस पद के लिए आवश्यक अर्हता को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उन्हें पद से हटाया गया और उन्हें कोई सजा नहीं दी गयी.
उस समय यह खबर मीडिया में आयी थी कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने उन्हें पद से पार्टी के ताकतवर महासचिव जेपी नड्डा के दबाव में हटाया. नड्डा के वाणिज्यिक हितों को एम्स सीवीसी के रूप में संजीव चतुर्वेदी द्वारा उठाये गये कदमों के कारण नुकसान हुआ था. इसलिए नड्डा को वे नहीं सुहा रहे थे और ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री को कह कर उन्हें पद से उन्होंने ही हटवाया.
चतुर्वेदी विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन को फोन कर मामले का सच पूछा था और इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट भेजने को कहा था. स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा की ओर से 23 अगस्त को पीएमओ के बड़े अधिकारियों को लिखी चिट्ठी में भी मोदी व डॉ हर्षवर्धन के बीच हुई बातचीत का जिक्र है. यह चिट्ठी कैबिनेट सचिव अजित सेठ के साथ प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र और सहायक प्रधान सचिव पीके मिश्र को भी भेजी गयी थी.
अब मीडिया में स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा द्वारा पीएमओ भेजी गयी रिपोर्ट के बारे में यह खबर आ रही है पीएम मोदी से न सिर्फ तथ्यों को छुपाया गया, बल्कि उनसे झूठ भी बोला गया. स्वास्थ्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में नहीं लिखा है कि भाजपा महासचिव जेपी नड्डा ने बार-बार संजीव चतुर्वेदी को पद से हटाने के लिए पत्र लिखा, जबकि संजीव चतुर्वेदी की फाइल के पेज 71 पर उन्हें सीवीसी के पद से हटाने के प्रस्ताव की शुरुआत ही जेपी नड्डा के पत्र से होती है. चतुर्वेदी को पद से हटाने के प्रस्ताव पर स्वास्थ्य सचिव का भी हस्ताक्षर है.
भाजपा के मिस्टर क्लीन माने जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन इस विवादित मामले के संदर्भ में पहले बड़े जोरदार ढंग से कह चुके हैं कि जेपी नड्डा की चिट्ठियों का एम्स के सीवीसी पद से चतुर्वेदी को हटाने का कोई संबंध नहीं है. नड्डा यह भी चाहते थे कि चतुर्वेदी ने जिन मामलों को उजागर किया है, उसकी समीक्षा नये सीवीसी से करायी जाये. जबकि पीएम को भेजी रिपोर्ट में नड्डा की चिट्ठी का कोई जिक्र नहीं है. उल्लेखनीय है कि जिस अर्हता के बहाने चतुर्वेदी को पद से हटाया गया, उसी अर्हता के संबंध में 23 मई को स्वास्थ्य सचिव ने स्वयं मुहर लगायी थी और इस संबंध में फाइल पर दस्तखत किया था.
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