क्यूरेटिव पिटीशन खारिज, बोलीं निर्भया की मां, सबसे बड़ा दिन 22 जनवरी होगा, जब दोषियों को फांसी होगी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jan 2020 2:35 PM
नयी दिल्ली : निर्भया के दोषियों द्वारा दाखिल क्यूरेटिव पिटीशन को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. यह पिटीशन दोषियों में से दो विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह ने दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई की. इस बेंच में जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, […]
नयी दिल्ली : निर्भया के दोषियों द्वारा दाखिल क्यूरेटिव पिटीशन को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. यह पिटीशन दोषियों में से दो विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह ने दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई की. इस बेंच में जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं. अब दोषियों के पास सजा कम करवाने का एकमात्र रास्ता यह है कि वे एक बार फिर राष्ट्रपति के समक्ष दया की अर्जी लगायें. अगर यह अर्जी भी खारिज हो गयी तो उन्हें 22 को फांसी हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन खारिज किये जाने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि यह मेरे लिए बड़ा दिन है. मैं पिछले सात साल से संघर्ष कर रही हूं. लेकिन हमारे लिए सबसे बड़ा दिन होगा 22 जनवरी, जब मेरी बेटी के दोषियों को फांसी होगी.
गौरतलब है कि सात जनवरी को दिल्ली की एक अदालत ने मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया था और कहा था कि उन्हें 22 जनवरी को सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी.
निर्भया की मां ने पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर कर दोषियों के डेथ वारंट की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने निर्भया की मां के हक में फैसला सुनाया और 22 जनवरी फांसी की तारीख के तौर पर मुकर्रर कर दी. आज सुबह भी निर्भया की मां ने यह कहा था कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर देगा.
क्या है क्यूरेटिव पिटीशन
क्यूरेटिव पिटीशन(क्यूरेटिव याचिका) तब दायर किया जाता है जब किसी मामले के दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है. ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन ही उस दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है, जिसके जरिए वह अपने लिए पहले से तय की गयी सजा में नरमी की गुहार लगा सकता है.
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