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नागरिकता विधेयक : विपक्ष को शाह का जवाब - यह बिल करोड़ों शरणार्थियों को यातनापूर्ण जीवन से दिलायेगी मुक्ति

Updated at : 09 Dec 2019 10:59 PM (IST)
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नागरिकता विधेयक : विपक्ष को शाह का जवाब - यह बिल करोड़ों शरणार्थियों को यातनापूर्ण जीवन से दिलायेगी मुक्ति

नयी दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में देर रात तक बहस जारी थी, गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया. उन्‍होंने साफ कर दिया कि यह बिल लाखों-करोड़ों शरणार्थियों को यातनापूर्ण जीवन से मुक्ति दिलाने का जरिया बनने जा रहा है. उन्‍होंने कहा, इस बिल के माध्यम […]

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नयी दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में देर रात तक बहस जारी थी, गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया. उन्‍होंने साफ कर दिया कि यह बिल लाखों-करोड़ों शरणार्थियों को यातनापूर्ण जीवन से मुक्ति दिलाने का जरिया बनने जा रहा है. उन्‍होंने कहा, इस बिल के माध्यम से उन शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम होगा.

उन्‍होंने कहा, कई सदस्यों ने आर्टिकल-14 का हवाला देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया. मैं कहना चाहता हूं कि किसी भी तरह से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है. न ही ये आर्टिकल-14 का उल्लंघन करता है. शाह ने विपक्ष के सवालों के जवाब में कहा, इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो मुझे बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती. सदन को ये स्वीकार करना होगा कि धर्म के आधार पर विभाजन हुआ है. जिस हिस्से में ज्यादा मुस्लिम रहते थे वो पाकिस्तान बना और दूसरा हिस्सा भारत बना.

शाह ने इससे पहले चर्चा के दौरान सदन में बिल को ऐतिहासिक करार दिया. उन्‍होंने कहा कि यह भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है तथा 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के 130 करोड़ लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाकर इसकी मंजूरी दी है.

शाह ने लोकसभा में विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए कहा कि हम पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति एवं रीति रिवाज का संरक्षण करने के लिये प्रतिबद्ध हैं. गृह मंत्री ने कहा कि हम पूर्वेात्तर के लोगों का आह्वान करते हैं कि वे किसी उकसावे में नहीं आएं. उन्होंने कहा कि यह विषय हमारे घोषणापत्र में शामिल रहा है जो जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है. शाह ने कहा, क्या केवल नेता के चेहरे, परिवार के नाम पर चुनाव लड़ने चाहिए.

शाह ने कहा कि यह विधेयक ऐसे लाखों करोड़ों लोगों को ‘नरक की यातना’ से निकालेगा जो पड़ोसी देशों से भारत आने पर मजबूर हुए और यहां उन्हें कोई भी अधिकार नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी के साथ अन्याय करने वाला नहीं, केवल न्याय करने वाला है.

लोग 70 साल से इस न्याय का इंतजार कर रहे थे. गृह मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार अल्पसंख्यकों की बात हो रही है तो क्या बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए शरणार्थी अल्पसंख्यक नहीं हैं जो धार्मिक आधार पर यातनाएं सहने के कारण वहां से भारत आए.

उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने पंथ निरपेक्षता की बात कही थी, हम उसका सम्मान करते हैं और उसे आगे ले जाने के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा कि किसी के भी साथ धार्मिक आधार पर दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए.

शाह ने कहा कि घुसपैठियों और शरणार्थियों की अलग पहचान करना भी जरूरी है. गृह मंत्री ने कहा कि राशन कार्ड या किसी दस्तावेज के बिना भी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा, कांग्रेस के सदस्य साबित कर दें कि विधेयक भेदभाव करता है तो मैं विधेयक वापस ले लूंगा.

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