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शरद पवार का बड़ा खुलासा : मोदी चाहते थे साथ मिलकर काम करें, मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया

Updated at : 02 Dec 2019 9:41 PM (IST)
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शरद पवार का बड़ा खुलासा : मोदी चाहते थे साथ मिलकर काम करें, मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया

मुंबई : राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया. पवार ने सोमवार को एक मराठी टीवी चैनल को साक्षात्कार में ये दावा किया. पवार ने कहा, मोदी ने मुझे साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव […]

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मुंबई : राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया. पवार ने सोमवार को एक मराठी टीवी चैनल को साक्षात्कार में ये दावा किया.

पवार ने कहा, मोदी ने मुझे साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था. मैंने उनसे कहा कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे, लेकिन मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है. पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा, लेकिन, मोदी नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया (सुले) को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था. सुप्रिया सुले, पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं.

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच पवार ने पिछले महीने मोदी से मुलाकात की थी. मोदी कई मौके पर पवार की तारीफ कर चुके हैं. पिछले दिनों मोदी ने कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से सीखना चाहिए. सूत्रों की मानें तोभाजपा को समर्थन देने के लिए पवार ने दो शर्तें रखी थीं. पहली शर्त थी कि केंद्र की राजनीति में बेटी सुप्रिया सुले के लिए कृषि मंत्रालय और दूसरी देवेंद्र फडणवीस की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाना. जब यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आयी तो वह सरकार बनाने के लिए इन शर्तों को मानने को तैयार नहीं हुए.

सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को लगा कि अगर महाराष्ट्र में समर्थन हासिल करने के लिए राकांपा को कृषि मंत्रालय दे दिया गया, तो फिर बिहार में पुराना सहयोगी जदयू रेल मंत्रालय के लिए दावा ठोक कर धर्मसंकट पैदा कर सकता है. ऐसे में प्रचंड बहुमत के बावजूद दो बड़े मंत्रालय भाजपा के हाथ से निकल सकते थे. पवार की दूसरी शर्त के बारे में बताया गया कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में देवेंद्र फडणवीस पांच साल तक बेदाग सत्ता चलाने में सफल रहे और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा. इसके बाद फडणवीस की जगह किसी दूसरे को सीएम बनाने की शर्त मानना भी भाजपा के लिए नामुमकिन था. सूत्रों का कहना है कि मांगों पर भाजपा की तरफ से सकारात्मक रुख न मिलने पर 20 अक्तूबर को जब संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शरद पवार मिले तो करीब 45-50 मिनट लंबी बातचीत चली. हालांकि इस मुलाकात में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शरद पवार की दोनों मांगों पर राजी नहीं हुए और न ही उन्होंने खुलकर कुछ कहा.

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