नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी को जब 10 दिन बिताना पड़ा था तिहाड़ जेल में, जानें कुछ खास बातें

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्ली/कोलकाता : अर्थशास्त्र के लिए संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार जीतनेवाले अभिजीत विनायक बनर्जी आज देश भर में चर्चा का केंद्र बन गये हैं. आइए उनके जीवन पर एक नजर डालते हैं....

1. अभिजीत बनर्जी की शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंसी कॉलेज, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुई.

2. वर्तमान में वह मैसेयूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इकोनॉमिक्स के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं.

3. वर्ष 2003 में उन्होंने अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (जे-पीएएल) की स्थापना की.

4. वह ब्यूरो फॉर द रिसर्च इन द इकोनॉमिक एनालिसिस डेवलपमेंट के पूर्व अध्यक्ष हैं.

5. अमेरिकन एकाडेमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस का उन्हें फेलो चुना गया था.

6. संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरली के पोस्ट-2015 डेवेलपमेंट एजेंडा के विशिष्ट लोगों के उच्च स्तरीय पैनेल में भी वह रहे.

7. उन्होंने कई किताबें लिखीं, जिनमें ‘ह्वाट द इकोनॉमी नीड्स नाऊ’, ‘पुअर इकोनॉमिक्स’ और ‘मेकिंग एड वर्क’ प्रमुख हैं. उन्होंने दो डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्देशन भी किया.

8. एस्थर डूफ्लो, उनकी पत्नी हैं तथा उनके साथ संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार विजेता हैं. डूफ्लो अर्थशास्त्र में नोबल पुरस्कार जीतनेवाली सर्वाधिक कम उम्र की महिला हैं.

9. अभिजीत के पिता दीपक बनर्जी प्रेसिडेंसी कॉलेज में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर थे.

10. जेएनयू कैंपस में रहने के दौरान अभिजीत किसी छात्र संगठन से नहीं जुड़े, लेकिन 1983 में जेएनयू में ऐडमिशन पॉलिसी में 'सुधार' के खिलाफ उन्होंने आंदोलन किया था. वह ऐसे 300 छात्रों में से एक थे, जिन्हें आंदोलन करने के कारण 10 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े.

11. अभिजीत को अच्छा खाने और नई जगहों को ट्राई करने का हमेशा से शौक रहा है.

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