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PM मोदी ने कहा- भले हमारी विचारधारा से सहमत न हों, सकारात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत

Updated at : 30 Aug 2019 7:52 PM (IST)
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PM मोदी ने कहा- भले हमारी विचारधारा से सहमत न हों, सकारात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में इतनी सभ्यता होनी चाहिए कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक-दूसरे को सुन सकें, भले ही वे हर बात पर एक-दूसरे से सहमत हो या नहीं हो. मोदी ने यह भी कहा कि नए भारत में ‘सरनेम’ (उपनाम) मायने नहीं रखता, बल्कि […]

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नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में इतनी सभ्यता होनी चाहिए कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक-दूसरे को सुन सकें, भले ही वे हर बात पर एक-दूसरे से सहमत हो या नहीं हो. मोदी ने यह भी कहा कि नए भारत में ‘सरनेम’ (उपनाम) मायने नहीं रखता, बल्कि अपना नाम बनाने की युवाओं की क्षमता मायने रखती है.

प्रधानमंत्री ने रचनात्मक आलोचना का स्वागत करते हुए कहा कि लोगों तथा संगठनों के बीच संवाद अवश्य होना चाहिए, भले ही उनके सोचने का तरीका कुछ भी हो. उन्होंने कहा, हमें हर बात पर सहमत होने की जरूरत नहीं है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में इतनी सभ्यता होनी चाहिए कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक-दूसरे को सुन सकें. मोदी यहां से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये कोच्चि में मलयाला मनोरमा के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा, यहां मैं ऐसे मंच पर हूं जहां शायद बहुत लोग ऐसे नहीं हैं जिनके विचार मुझसे मिलते हो, लेकिन ऐसे काफी संख्या में विचारवान लोग हैं जिनकी रचनात्मक आलोचना को लेकर मैं काफी आशान्वित हूं. इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी, कांग्रेस नेता शशि थरूर, भाकपा नेता डी राजा, माकपा नेता मोहम्मद सलीम, तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे.

उन्होंने कहा, यह नया भारत है जहां युवा का ‘सरनेम’ मायने नहीं रखता, बल्कि अपना नाम बनाने की उसकी क्षमता मायने रखती है. यह नया भारत है जहां भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं है. उन्होंने कहा, यहां मैं एक ऐसे फोरम पर हूं जहां शायद बहुत से लोगों का सोचने का तरीका मेरे जैसा न हो, लेकिन ये चिंतनशील लोग हैं जिनकी रचनात्मक आलोचना का मुझे इंतजार रहता है. मोदी ने कहा कि आम तौर पर माना जाता है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग ऐसे मंचों पर जाना पसंद करते हैं जहां की सोच व्यक्ति की खुद की सोच से मिलती हो क्योंकि ऐसे लोगों के बीच काफी सहज महसूस होता है. प्रधानमंत्री ने कहा, बेशक, मुझे भी ऐसे माहौल में अच्छा लगता है, लेकिन साथ ही, मेरा यह भी मानना है कि लोगों और संगठनों के बीच संवाद अवश्य होना चाहिए, भले ही उनके सोचने का तरीका कुछ भी हो.

उन्होंने कहा कि लाइसेंस राज और परमिट राज की आर्थिक व्यवस्था लोगों की आकांक्षाओं में रुकावट का काम करती है. लेकिन, आज चीजें बेहतरी के लिए बदल रही हैं. हम विविधतापूर्ण स्टार्टअप ईको-सिस्टम में ‘न्यू इंडिया’ की भावना को देख रहे हैं. मोदी ने कहा कि वर्षों तक ऐसी संस्कृति को आगे बढ़ाया गया जहां आकांक्षा एक बुरा शब्द बन गया. तब ‘सरनेम’ और संपर्क के आधार पर दरवाजे खुलते थे. उन्होंने कहा, आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती थी कि आप ‘ओल्ड ब्वॉयज़ क्लब’ के सदस्य हैं या नहीं. बड़े शहर, बड़े संस्थान और बड़े परिवार ये सभी मायने रखते थे. मोदी ने कहा, आज स्थिति बदली है, हमारे युवा उद्यमिता की भावना प्रदर्शित कर रहे हैं और शानदार मंच सृजित कर रहे हैं. हम यह भाव खेल के क्षेत्र में भी देख रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, भारत आज उन क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रहा है जहां हम पहले मुश्किल से नजर आते थे. चाहे स्टार्टअप हो, चाहे खेल हो. उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और गांव के युवा जो स्थापित परिवारों से नहीं आते, जिनके पास बड़ा बैंक बैलेंस नहीं है, लेकिन उनके पास समर्पण और आकांक्षा है. वे अपनी आकांक्षाओं को उत्कृष्टता में बदल रहे हैं और भारत को गौरवान्वित कर रहे हैं. यह नये भारत की भावना है. मोदी ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां इतनी अधिक संख्या में भाषाएं बोली जाती हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वह सुझाव देना चाहते हैं कि क्या हम इन भाषाओं का उपयोग एकता के लिए नहीं कर सकते? क्या मीडिया सेतु का काम कर सकता है और अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोगों को करीब ला सकता है? यह इतना भी कठिन नहीं है जितना दिखता है.

उन्होंने कहा, आज लोग कहते हैं कि हम स्वच्छ भारत बनाकर रहेंगे. हम भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करके रहेंगे. हम सुशासन को एक जन-आंदोलन बनाकर रहेंगे. यह सब केवल दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही संभव हुआ है. मोदी ने कहा कि अब आम लोग रेलवे स्टेशनों पर वाई फाई सुविधाओं का उपयोग करने लगे हैं. क्या कभी किसी ने सोचा था कि यह संभव हो पायेगा? सिस्टम भी वही है और लोग भी वही हैं. अंतर आया है तो केवल काम करने के तरीके में. उन्होंने कहा कि नए भारत के हमारे विजन में न केवल देश में रहने वाले लोगों को शामिल किया गया, बल्कि विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी शामिल किया गया है. भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान करने वाले भारतवंशी हमारा गौरव हैं. मोदी ने अपनी हाल की बहरीन यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्‍हें बहरीन की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्‍त हुआ और इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण वहां की जेलों में बंद 250 भारतीय लोगों को क्षमा दान करने का शाही परिवार का निर्णय है.

उन्होंने संयुक्‍त अरब अमीरात में रुपे कार्ड लॉन्‍च किये जाने का जिक्र किया और कहा कि इससे खाड़ी में काम करने वाले लाखों लोगों को लाभ होगा, जो पैसा स्‍वदेश भेजते हैं. उन्होंने स्‍वच्‍छ भारत, एकल उपयोग वाली प्‍लास्टिक पर रोक, जल संरक्षण, फिट इंडि‍या तथा प्रमुख आंदोलनों में मीडिया द्वारा निभायी गयी सार्थक भूमिका का उल्‍लेख किया. समारोह को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र में भाजपा नीत सरकार मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध है. उन्होंने आपातकाल के दौरान मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिये अपने दल के नेताओं के संघर्ष को भी याद किया.

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