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भारत में अस्पतालों से खुश नहीं हैं लोग, बढ़ रहा असंतोष

Updated at : 23 Aug 2019 6:19 AM (IST)
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भारत में अस्पतालों से खुश नहीं हैं लोग, बढ़ रहा असंतोष

फिक्की ने जारी की रि-इंजीनियरिंग इंडियन हेल्थकेयर 2.0 रिपोर्ट, सामने आयी अस्पतालों की दुर्दशा अस्पताल के गैर जिम्मेदाराना रवैये और हर बात के लिए वेटिंग टाइम से लोग नाराज फिक्की की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट रि-इंजीनियरिंग इंडियन हेल्थकेयर 2.0 के मुताबिक, भारत में अस्पतालों में दी जा रही सेवाओं से रोगियों में असंतोष बढ़ […]

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फिक्की ने जारी की रि-इंजीनियरिंग इंडियन हेल्थकेयर 2.0 रिपोर्ट, सामने आयी अस्पतालों की दुर्दशा
अस्पताल के गैर जिम्मेदाराना रवैये और हर बात के लिए वेटिंग टाइम से लोग नाराज
फिक्की की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट रि-इंजीनियरिंग इंडियन हेल्थकेयर 2.0 के मुताबिक, भारत में अस्पतालों में दी जा रही सेवाओं से रोगियों में असंतोष बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 60% से अधिक मरीज अस्पताल की जिम्मेदारी और वेटिंग टाइम से खुश नहीं हैं. रोगियों का कहना है कि अस्पताल प्रतिक्रिया के बारे में चिंतित नहीं हैं और उन्हें इसकी परवाह भी नहीं है.
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में इस बात की तस्दीक की है. सर्वे के मुताबिक, देश की करीब आधी आबादी इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है. देश की करीब 45 फीसदी आबादी सरकारी अस्पतालों में इलाज कराती है, इनमें से 28 फीसदी लोग सरकारी अस्पतालों के इलाज से संतुष्ट नहीं हैं. 18.40 फीसदी लोगों का कहना है कि इलाज में देरी होती है.
वहीं, 22 फीसदी लोगों का मानना है कि अस्पतालों में उपचार के लिए जरूरी मशीनें नहीं हैं. सर्वे के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों की ओर महिलाओं का रुख बढ़ा है. देश की करीब 45.4 फीसदी महिलाएं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं.
सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाली महिलाओं में से ग्रामीण महिलाओं की संख्या में 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 50.3 फीसदी ग्रामीण महिलाएं अब इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में जाती हैं. जबकि 35.5 फीसदी शहरी महिलाएं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं.
लोगों के मुताबिक, अब तस्वीर बदलने की जरूरत है. सर्वे के मुताबिक, 15.10 फीसदी लोग ढंग से इलाज नहीं करा पाते हैं. 13 फीसदी लोगों के नजदीक में अस्पताल नहीं है. आठ फीसदी मरीजों को सरकारी अस्पताल गंभीरता से नहीं लेते. जबकि, चार फीसदी लोग आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करा पाते हैं.
5इ फ्रेमवर्क पर जोर
एम्पैथी (सहानुभूति)
एफिशियन्सी (दक्षता)
एम्पावरमेंट (सशक्तिकरण)
इज (आराम)
एन्वायरनमेंट (वातावरण)
यहां सरकारी सुविधाएं बेहतर
स्वीडन, पोलैंड, जर्मनी, न्यूजीलैंड, रुस, अमेरिका
63% मरीज अस्पताल की जिम्मेदारी और प्रतीक्षा के समय
से खुश नहीं
59% रोगियों ने कहा कि अस्पताल मरीजों से मिले फीडबैक के बारे में चिंतित नहीं
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