#KulbhushanJadhav: ऐसे ही भारत को नहीं मिली इतनी बड़ी कामयाबी, जानिये अब तक का तिथिवार घटनाक्रम...

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jul 2019 9:31 PM

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हेग/नयी दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने बुधवार को फैसला सुनाया कि पाकिस्तान को भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर फिर से विचार करना चाहिए. इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. इस मामले में भारत को ऐसे ही इतनी बड़ी कामयाबी नहीं मिल गयी है. आइये, […]

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हेग/नयी दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने बुधवार को फैसला सुनाया कि पाकिस्तान को भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गयी फांसी की सजा पर फिर से विचार करना चाहिए. इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. इस मामले में भारत को ऐसे ही इतनी बड़ी कामयाबी नहीं मिल गयी है. आइये, जानते हैं इस मामले से जुड़े पूरे घटनाक्रम को…

इसे भी देखें : ICJ से भारत को मिली बड़ी कामयाबी, पाकिस्तान को लगा करारा झटका : #KulbhushanJadhav की फांसी की सजा पर लगी रोक

कुलभूषण जाधव मामले का तिथिवार घटनाक्रम…

3 मार्च 2016 : पाकिस्तान ने पूर्व भारतीय नौसैन्य अधिकारी कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया.

24 मार्च, 2016 : पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि जाधव ‘भारतीय जासूस’ हैं, जिन्हें बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया.

26 मार्च, 2016 : भारत सरकार ने दावा किया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान में कार्गो कारोबार के मालिक जाधव को बलूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, जैसा कि पाकिस्तान ने दावा किया था.

29 मार्च, 2016 : नयी दिल्ली ने जाधव के लिए इस्लामाबाद से राजनयिक पहुंच की अनुमति मांगी. अगले एक साल में उसने 16 ऐसे अनुरोध किये, जिन्हें पाकिस्तान ने ठुकरा दिया.

10 अप्रैल, 2017 : एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जाधव को ‘पाकिस्तान के खिलाफ जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों’ में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनायी. भारत ने इस्लामाबाद को आगाह किया कि यह पूर्व-नियोजित हत्या का मामला है.

11 अप्रैल, 2017 : तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया कि जाधव को न्याय दिलाने के लिए भारत हर कदम उठायेगा.

14 अप्रैल, 2017 : भारत ने पाकिस्तान से आरोपपत्र की प्रमाणित प्रति के साथ-साथ जाधव को मौत की सजा के फैसले की प्रति की मांग की और उनके लिए दूतावास संबंधी पहुंच देने की मांग की.

20 अप्रैल, 2017 : भारत ने आधिकारिक तौर पर कुलभूषण जाधव के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही के साथ-साथ मामले में अपील की प्रक्रिया का विवरण भी मांगा.

27 अप्रैल, 2017 : तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को पत्र लिखकर जाधव के परिवार के लिए वीजा का अनुरोध किया.

8 मई, 2017 : भारत ने पाकिस्तान सैन्य अदालतों के फैसले के खिलाफ हेग में अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाया.

9 मई, 2017 : आईसीजे ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी.

15 मई, 2017 : आईसीजे में जाधव के मामले पर भारत और पाकिस्तान में बहस हुई. नयी दिल्ली ने मौत की सजा को तुरंत रद्द करने की मांग की और इस्लामाबाद पर आरोप लगाया कि वह गलत याचिका के जरिये विश्व निकाय के मंच का दुरुपयोग कर रहा है.

18 मई, 2017 : आईसीजे ने अपने अंतिम आदेश तक पाकिस्तान को सजा पर रोक लगाये रखने के लिए कहा.

26 दिसंबर, 2017: पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किये जाने और जासूसी का आरोप लगाये जाने के एक साल से अधिक समय बाद कुलभूषण जाधव अपनी पत्नी और मां से मिले.

17 अप्रैल, 2018 : भारत ने जाधव के मामले में आईसीजे में लिखित जवाब दायर किया.

17 जुलाई, 2018 : पाकिस्तान ने जाधव की दोषसिद्धि पर आईसीजे में अपना दूसरा प्रतिवाद दायर किया.

22 अगस्त, 2018 : जाधव के मामले की सुनवाई के लिए आईसीजे ने फरवरी, 2019 का वक्त निर्धारित किया.

21 नवंबर, 2018 : तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कुलभूषण जाधव तक राजनयिक पहुंच देने की मांग की.

18 फरवरी 2019 : कुलभूषण जाधव के मामले में चार दिन की सुनवाई हुई.

19 फरवरी 2019 : भारत ने आईसीजे से आग्रह किया कि वह जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा दी गयी मौत की सजा को रद्द करे और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दे.

20 फरवरी, 2019 : भारत ने पाकिस्तान की कुख्यात सैन्य अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाये और आईसीजे से जाधव की मौत की सजा को निरस्त करने का आग्रह किया.

21 फरवरी, 2019 : पाकिस्तान ने आईसीजे से जाधव को राहत देने के लिए भारत के दावे को ‘खारिज या अस्वीकार्य’ घोषित करने के लिए कहा.

4 जुलाई, 2019 : आईसीजे ने घोषणा की कि वह 17 जुलाई को कुलभूषण जाधव मामले में फैसला सुनायेगा.

17 जुलाई, 2019 : भारत के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर आईसीजे ने फैसला दिया कि पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव के लिए मौत की सजा की समीक्षा करनी चाहिए और उसे राजनयिक पहुंच प्रदान करनी चाहिए.

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