इस लोस चुनाव में एक ही परिवार के लोग अलग-अलग पार्टियों से चुनाव मैदान में उतरे हैं. लिहाजा, कई बड़े नेताओं के लिए यह धर्मसंकट रहा कि वे किसका प्रचार करें. यह स्थिति पहले दो चरणों में भी रही.
कांग्रेस के राधाकृष्ण विखे पाटिल, भाजपा के सुजय विखे पाटिल : महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल अहमदनगर में भाजपा के प्रत्याशी हैं. सुजय के लिए वोट मांगना राधाकृष्ण के लिए काफी मुश्किल हो रहा है. सुजय न्यूरोसर्जन हैं.
कांग्रेसी बेटे के लिए भाजपाई पिता ने मंत्री पद छोड़ा : हिमाचल प्रदेश मेें कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के पौत्र आश्रय शर्मा को मंडी से अपना उम्मीदवार बनाया. आश्रय के पिता अनिल शर्मा भाजपा से विधायक हैं. शर्मा हिमाचल में ऊर्जा मंत्री थे. कांग्रेस द्वारा बेटे को मंडी से उम्मीदवार बनाये जाने पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अब नतीजे का इंतजार कर रहे हैं.
गौतमबुद्ध नगर में रहा यह असमंजस
यहां चुनाव हो चुका है, पर भाजपा एमएलसी जयवीर सिंह के लिए कांग्रेसी बेटे अरविंद कुमार सिंह के लिए वोट मांगना कठिन रहा.
कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा सपा की पूनम सिन्हा
पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस से व उनकी पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ में सपा से चुनावी मैदान में हैं. अब शत्रुघ्न के ऊपर संकट की स्थिति बनी हुई है कि वह कांग्रेस के लिए प्रचार करें या महागठबंन का विरोध करें. लखनऊ से कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद कृष्णम ने सिन्हा पर इसे लेकर तंज भी कसा है.
पिता-पुत्री आमने-सामने
आंध्र प्रदेश की अराकू लोकसभा सीट पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही. यहां पिता और पुत्री के बीच कड़ा मुकाबला रहा. इस सीट पर विरीचेरला किशोर चंद्र देव तेलुगू देशम पार्टी की तरफ से खड़े हुए, तो उनकी बेटी श्रुति देवी को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया.
