…..जब पादरियों को छात्रों से अच्छा खाना मिलने पर भिड़ गये थे समाजवादी नेता जॉर्ज
Author Prabhat khabar digital desk
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जन्म: कर्नाटक के मेंगलूरू में पहचान समाजवादी नेता के रूप में रही जॉर्ज जब वह 16 साल के थे, घर वालों ने उन्हें ईसाई मिशनरी में पादरी बनने की ट्रेनिंग लेने भेज दिया. विद्रोही स्वभाव के जॉर्ज यह देख कर उबल पड़े कि वहां छात्रों के मुकाबले पादरियों को बेहतर खाना मिलता है. अन्याय के […]
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जन्म: कर्नाटक के मेंगलूरू में
पहचान समाजवादी नेता के रूप में रही
जॉर्ज जब वह 16 साल के थे, घर वालों ने उन्हें ईसाई मिशनरी में पादरी बनने की ट्रेनिंग लेने भेज दिया. विद्रोही स्वभाव के जॉर्ज यह देख कर उबल पड़े कि वहां छात्रों के मुकाबले पादरियों को बेहतर खाना मिलता है. अन्याय के खिलाफ संघर्ष का जो सिलसिला जॉर्ज ने यहां से शुरू किया, वही उनकी पहचान बनी. 19 साल की उम्र में उन्होंने पादरी की पढ़ाई छोड़ दी. मुंबई में जा कर यूनियन नेता बन गये.
वह दक्षिण बांबे, मुजफ्फरपुर और नालंदा से कई बार सांसद चुने गये. 1970 के दशक में देश में रेलवे की पहली हड़ताल की. बाद में रेल मंत्री बने. उद्योग मंत्री के नाते कोका कोला और आइबीएम जैसी कंपनियों को हिंदुस्तान से खदेड़ा. रक्षा क्षेत्र की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया. कहते थे, हमारा दुश्मन नंबर वन पाक नहीं, चीन है.
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