पहले भी तीन वायु सेना के अधिकारी लौट चुके हैं स्वदेश
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Mar 2019 1:38 AM (IST)
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दिल्ली : भारत विंग कमांडर अभिनंदन के ‘अभिनंदन’ के लिए तैयार है. अभिनंदन को पाक फौज ने उस वक्त पकड़ लिया था जब उनका विमान, पाक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर में जा गिरा था. अभिनंदन की ही बदौलत भारत में पाकिस्तानी वायुसेना की घुसपैठ नाकाम हुई थी. इसे […]
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दिल्ली : भारत विंग कमांडर अभिनंदन के ‘अभिनंदन’ के लिए तैयार है. अभिनंदन को पाक फौज ने उस वक्त पकड़ लिया था जब उनका विमान, पाक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर में जा गिरा था. अभिनंदन की ही बदौलत भारत में पाकिस्तानी वायुसेना की घुसपैठ नाकाम हुई थी. इसे बाद भारत सरकार के दबाव के बाद गुरुवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में अभिनंदन को सकुशल भारत को सौंपने घोषणा की थी.
अभिनंदन के अलावा ऐसे तीन भारतीय वायुसेना अधिकारी भी हैं जो पाकिस्तान के साथ हुए 1965, 1971 और 1999 के युद्ध के दौरान पाक फौज की हिरासत में रहे और जिन्होंने वहां कारावास में फौज का उत्पीड़न सहा था. तीनों को ही अभिनंदन की ही तरह पाकिस्तानी वायुसेना को करारा जवाब देने के दौरान पकड़ लिया गया था. ये तीन भारतीय वायुसेना पायलट कंबंपति नचिकेता, जेएल भार्गव और केसी करियप्पा हैं.
नचिकेता भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1999 के करगिल युद्ध के दौरान गिरफ्तार हुए और आठ दिनों तक पाक हिरासत में रहे. वहीं, जेएल भार्गव 1971 के युद्ध में एक साल तक पाक सेना की कैद में रहे. 1965 के युद्ध में एयर मार्शल केसी करियप्पा ने चार महीने पाक फौज की हिरासत में बिताये.
जेएल भार्गव से पाक के अधिकारी ने कहा- कलमा पढ़ें
पूर्व एयर कोमोडोर जेएल भार्गव 1971 के युद्ध में पाक सेना द्वारा पकड़े गये. भार्गव को पाक सेना ने कलमा पढ़ने के लिए कहा और जब वह नहीं पढ़ पाये तो उन्हें जेल भेज दिया गया. भार्गव का विमान 5 दिसंबर, 1971 को पाक में गिरा था.
उन्होंने पाक फौज के हाथ लगने से पहले बारह घंटे तक अपनी पहचान छिपाये रखी थी. अपनी पहचान छिपाते-छिपाते आखिर में वे पाक फौज के हाथ लग ही गये. इससे पहले तक वे खुद को पाक सेना का जवान बताते रहे.
उन्हें जब गिरफ्तार किया गया था तो अभिनंदन की तरह ही उनसे भी पूछा गया कि वह कहां से हैं, उन्होंने खुद को रावलपिंडी का बताया. जब किसी ने उनसे कहा कि वह भारत में खड़े हैं तो भार्गव चालाकी समझ गये और खुद को पाक भेजने की गुजारिश करने लगे.
नचिकेता को आठ दिनों तक अंधेरे कारावास में रखा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता करगिल युद्ध के हीरो हैं. 26 मई, 1999 को करगिल युद्ध के दौरान बटालिक सेक्टर में जाने वाले नंबर 9स्क्वाड्रन आइएएफ पायलटों में से एक थे. नचिकेता ने 80 एमएम रॉकेट्स के जरिये दुश्मन के ठिकाने पर पहला वार किया और जैसे ही 30एमएम केनन से दूसरा वार कर रहे थे, विमान के इंजन में आग लग गयी और इंजन फेल हो गया.
नचिकेता विमान से कूद गये और पाक की धरती पर पहुंच गये. जैसे ही वह पाकिस्तान की धरती पर पहुंचे उन्होंने पहले दो-तीन घंटों तक खुद को पाक फौज की पकड़ में आने से बचाये रखा. इसके बाद गस्त पर आयी पाक फौज ने उन्हें पकड़ लिया और आठ दिनों तक रावलपिंडी में अंधेरे कारावास में डाले रखा. यहां उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया. उनसे तरह-तरह की जानकारी मांगी गयी.
पाक हिरासत में चार महीने रहे एयर मार्शल करियप्पा
एयर मार्शल केसी करियप्पा का विमान 1965 के युद्ध के आखिरी दिन पीओके में जा गिरा था. चार महीने पाक हिरासत में बिताने के बाद वह सकुशल भारत लौटे थे. केसी करियप्पा ने भी दूसरे वायुसेना अधिकारियों की ही तरह पाक फौज को सिर्फ अपना नाम, यूनिट नंबर व रैंक बतायी थी.
उन्होंने पाक स्तानी फौज को यह जानकारी नहीं दी कि उनके पिता फील्ड मार्शल केएम करियप्पा हैं, जो कि आजाद भारत में सशस्त्र बलों के पहले भारतीय प्रमुख थे. इसके बाद पाकिस्तान के जनरल अयूब खान ने रेडियो के जरिये उनके पाक में गिरफ्तारी की घोषणा की और उनके सुरक्षित होने के बारे में जानकारी दी.
इतना ही नहीं अयूब खान ने उन्हें जल्द रिहा करने की भी घोषणा की क्योंकि केसी करियप्पा के पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी के दौरान अयूब खान के बॉस थे.
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