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सवर्ण आरक्षण: सिर्फ दो करोड़ लोग ही सवर्ण आरक्षण के दायरे में नहीं आयेंगे

Updated at : 09 Jan 2019 8:06 AM (IST)
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सवर्ण आरक्षण: सिर्फ दो करोड़ लोग ही सवर्ण आरक्षण के दायरे में नहीं आयेंगे

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने के लिए देश में कोई जातिगत जनगणना का आंकड़ा मौजूद नहीं है. हालांकि, 2011 में सरकार ने सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ी जातियों की जनगणना करायी थी, लेकिन इसका आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. ये बातें आप भी जानें.. दो लाख से […]

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सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने के लिए देश में कोई जातिगत जनगणना का आंकड़ा मौजूद नहीं है. हालांकि, 2011 में सरकार ने सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ी जातियों की जनगणना करायी थी, लेकिन इसका आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. ये बातें आप भी जानें..

दो लाख से कम लोगों की आय 50 लाख से अधिक

99 लाख लोगों ने अपनी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अिधक घोषित की है

24 लाख लोग सालभर में 10 लाख रुपये से अधिक आय की घोषणा करते हैं

1.72 करोड़ लोगों ने अपनी वार्षिक आय 50 लाख रुपये से अधिक घोषित की है

10% आरक्षण के लिए कितने दावेदार : अनुमान

93.3% परिवारों की वार्षिक आय 01-2.5 लाख के बीच है

6.28% परिवारों की वार्षिक आय 2.5-50 लाख के बीच है

0.35% परिवारों की वार्षिक आय पचास लाख से ज्यादा है, जो इस दायरे में नहीं आयेंगे

(यह गणना असेसमेंट इयर 2015-16 के दौरान की गयी है)

05 एकड़ से कम भूमि : 86 फीसदी परिवार आयेंगे दायरे में
केंद्र द्वारा करायी गयी कृषि जनगणना 2015-16, जिसका आंकड़ा सितंबर, 2018 में जारी किया गया, के मुताबिक देश की 86 फीसदी भूमि पर काबिज जनसंख्या इस आरक्षण के लिए मान्य है. देश में एक हेक्टेयर भूमि वाले (मार्जिनल) परिवारों की संख्या 99,858 है. वहीं, 1-2 हेक्टेयर भूमि वाले (स्मॉल) परिवारों की संख्या 25,777 है. देश में दो एकड़ से कम भूमि वाले कुल परिवार 1,25,635 जबकि सभी आकार की भूमि वाले परिवारों की कुल संख्या 1,45,727 है.

प्रति व्यक्ति आय परिवार में सदस्य के हिसाब से
चार्ट के मुताबिक, यदि परिवार में पांच सदस्य हैं, तो शीर्ष 5% जनसंख्या वाले गांवों में मासिक आय 22,405 रुपये है और शहरों में मासिक आय 51,405 रुपये है.

08 लाख प्रति वर्ष आय : 100% परिवारों को आरक्षण संभव
नेशनल सैंपल सर्वे 2011-12 के मुताबिक, देश के 100 फीसदी परिवार इस आरक्षण के लिए मान्य हैं. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शीर्ष पांच फीसदी जनसंख्या-यदि प्रति परिवार पांच सदस्य की गणना की जाये, तो उनकी मासिक आय 66,666 रुपये से कम आती है. मासिक प्रति व्यक्ति खर्च का यह आकलन मॉडिफाइड मिक्स्ड रेफेरेंस पीरियड नियम से किया गया है.

न्यूनतम वार्षिक आय 99 फीसदी ग्रामीण परिवार होंगे दावेदार
नाबार्ड द्वारा 2016-17 में कराये गये ऑल इंडिया रूरल फाइनांनशियल इंक्लूजन सर्वे के मुताबिक, केंद्र द्वारा 10 फीसदी आरक्षण के लिए तय न्यूनतम वार्षिक आय की शर्त में ग्रामीण इलाकों के सभी परिवार शामिल होंगे. सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में शीर्ष एक फीसदी परिवार की मासिक आय 48,833 रुपये है. वहीं, शीर्ष पांच फीसदी परिवार की मासिक आय 23,375 रुपये आंकी गयी है. शीर्ष 10 फीसदी परिवार की मासिक आय महज 17,000 रुपये है.

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