जांच एजेंसियों को सरकार ने नहीं दी है कम्प्यूटर में ताक-झांक की पूर्ण शक्तियां

Updated at : 30 Dec 2018 4:42 PM (IST)
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जांच एजेंसियों को सरकार ने नहीं दी है कम्प्यूटर में ताक-झांक की पूर्ण शक्तियां

नयी दिल्ली : गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने किसी कम्प्यूटर से जानकारी निकालने (इंटरसेप्ट) के लिए किसी भी एजेंसी को ‘पूर्ण शक्ति’ नहीं दी है. इन एजेंसियों को इस तरह की कार्रवाई के दौरान वर्तमान नियम कानून का कड़ाई से पालन करना होगा. अधिकारी ने कहा कि […]

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नयी दिल्ली : गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने किसी कम्प्यूटर से जानकारी निकालने (इंटरसेप्ट) के लिए किसी भी एजेंसी को ‘पूर्ण शक्ति’ नहीं दी है. इन एजेंसियों को इस तरह की कार्रवाई के दौरान वर्तमान नियम कानून का कड़ाई से पालन करना होगा.

अधिकारी ने कहा कि कोई नया कानून, कोई नया नियम, कोई नयी प्रक्रिया, कोई नयी एजेंसी, कोई पूर्ण शक्ति, कोई पूर्ण अधिकार जैसा कुछ नहीं है और यह पुराना कानून, पुराना नियम, पुरानी प्रक्रिया और पुरानी एजेंसियां हैं. अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि ‘वर्तमान नियम शब्दश: वही हैं और इसमें कौमा या फुल स्टॉप का भी कोई फर्क नहीं है.’

गृह मंत्रालय की 20 दिसंबर की अधिसूचना में 10 एजेंसियों का नाम लिया गया था. इस अधिसूचना ने राजनीतिक भूचाल ला दिया था और विपक्ष ने सरकार पर ‘निगरानी राज्य’ बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना में बतायी गयी 10 एजेंसियों को 2011 से इलेक्ट्रॉनिक संचारों को बीच में रोककर जानकारी हासिल की शक्ति पहले से थी.

गृह मंत्रालय ने इस साल 20 दिसंबर को इन एजेंसियों का उल्लेख करते हुए 2011 की ‘आदर्श परिचालन प्रक्रियाओं’ को दोहराया था, जिसमें कहा गया कि इस तरह के हर ‘इंटरसेप्ट’ के लिए संबंधित प्राधिकार (केंद्रीय गृह सचिव या राज्य गृह सचिव) से पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी.

केंद्र सरकार का कहना है कि कम्प्यूटर डेटा को हासिल करके जानकारी लेने और इसकी निगरानी करने के नियम 2009 में उस समय बनाये गये थे, जब कांग्रेस नीत यूपीए सत्ता में थी. नये आदेश में केवल उन एजेंसियों का नाम बताया है, जो इस तरह का कदम उठा सकती हैं.

अधिकारी ने कहा, ‘अधिसूचना और कुछ नहीं, बल्कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को भेजी गयी सूची है, ताकि सुनिश्चित हो कि केवल अधिकृत एवं विशेष एजेंसियां संचार को बीच में रोककर जानकारी हासिल कर सकें और अनधिकृत एजेंसियों या सेवा प्रदाताओं द्वारा दुरुपयोग नहीं हो.’

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