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अनदेखी : बुद्ध सर्किट के लिए सरकार ने दिये मात्र एक लाख रुपये

Updated at : 17 Dec 2018 6:41 AM (IST)
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अनदेखी : बुद्ध सर्किट के लिए सरकार ने दिये मात्र एक लाख रुपये

भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थलों को जोड़ने के लिए सरकार ने दिये कम पैसे, संसदीय समिति ने लताड़ा नयी दिल्ली : भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन से जुड़े प्रमुख स्थलों को पर्यटन मानचित्र से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘बुद्ध सर्किट’ वित्तीय आवंटन की भारी कमी से जूझ रही है. संसद की एक समिति […]

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भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थलों को जोड़ने के लिए सरकार ने दिये कम पैसे, संसदीय समिति ने लताड़ा

नयी दिल्ली : भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन से जुड़े प्रमुख स्थलों को पर्यटन मानचित्र से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘बुद्ध सर्किट’ वित्तीय आवंटन की भारी कमी से जूझ रही है.

संसद की एक समिति ने 1985 में शुरू की गयी इस योजना के लिए बेहद कम राशि का आवंटन करने के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया है. ‘बुद्ध सर्किट’ परियोजना के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा चालू वित्त वर्ष में अब तक महज एक लाख रुपये जारी किये गये हैं. परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में परियोजना की धीमी गति का जिक्र करते हुए यह जानकारी दी गयी है. ‘भारत में बौद्ध सर्किट के विकास’ पर संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को पेश रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में बौद्ध परिपथ के विकास के लिए 0.01 करोड़ रुपये की नाममात्र की राशि आवंटित की गयी है.

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन मंत्रालय के पास इस साल 2150 करोड़ रुपये का कुल बजट है. इसमें से 1100 करोड़ रुपये ‘स्वदेश दर्शन योजना’ और 150 करोड़ रुपये ‘प्रसाद योजना’ के लिए आवंटित किये गये हैं. बौद्ध सर्किट के विकास के लिए महज एक लाख रुपये के आवंटन को नगण्य बताते हुए समिति ने कहा कि इस सांकेतिक राशि का आवंटन बौद्ध सर्किट के विकास के लिए पूरी तरह से अपर्याप्त है. यह बहुत ही अव्यवहारिक है.

1100 करोड़ ‘स्वदेश दर्शन’ और 150 करोड़ ‘प्रसाद योजना’ को दिये गये

1985 से ही बुद्ध सर्किट की विकास की गति रही धीमी

समिति ने कहा कि 1885 में इस योजना की अवधारणा के समय से ही बुद्ध सर्किट की विकास गति बहुत धीमी है. इसमें राशि की ही कमी नहीं रही, बल्कि इसके कार्यान्वयन में भी कमी रही. इस योजना में वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए 2005 में केंद्र सरकार ने जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) के साथ 396 करोड़ रुपये का समझौता कर योजना के दूसरे चरण को शुरू किया. जुलाई, 2012 में जीका ने परियोजना स्थलों की जमीनी सच्चाई में मूलभूत बदलाव आने का हवाला देते हुए परियोजना को जारी रख पाने में असमर्थता जतायी.

361.97 करोड़ में से 72.4 करोड़ जारी हुए

मंत्रालय ने 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना के तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाले बौद्ध सर्किटि के विकास के लिए 2016-18 के लिए स्वीकृत 361.97 करोड़ रुपये में से केवल 72.4 करोड़ रुपये जारी किये.

इन स्थानों को जोड़ना था

इस योजना के तहत मध्य प्रदेश में सांची, सतना, रीवा, मंदसौर और धार, उत्तर प्रदेश में श्रावस्ती, कुशीनगर एवं कपिलवस्तु, बिहार में बोधगया और राजगीर, गुजरात में जूनागढ़, गिर, सोमनाथ, भरूच, कच्छ, भावनगर, राजकोट, मेहसाणा तथा आंध्र प्रदेश में शालिहुंडम, थोटनाकोंडा, बाविकोंडा, बोजनाकोंडा और अमरावती को परिपथ के माध्यम से विभिन्न मार्गों से जोड़ते हुए इन स्थलों को पर्यटन सुविधाओं से लैस करना है.

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