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उमर अब्दुल्ला ने कहा - पीआरसी प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव अमान्य

Updated at : 02 Dec 2018 6:48 PM (IST)
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उमर अब्दुल्ला ने कहा - पीआरसी प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव अमान्य

श्रीनगर : नेशनल कान्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी जम्मू कश्मीर में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) प्रदान करने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के उद्देश्यवाले किसी भी कदम का विरोध करेगी. अब्दुल्ला ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक नीत राज्य प्रशासन परिषद (एसएसी) के इस संबंध में कथित निर्देशों को […]

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श्रीनगर : नेशनल कान्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी जम्मू कश्मीर में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) प्रदान करने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के उद्देश्यवाले किसी भी कदम का विरोध करेगी.

अब्दुल्ला ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक नीत राज्य प्रशासन परिषद (एसएसी) के इस संबंध में कथित निर्देशों को राज्य की जनसांख्यिकी बिगाड़ने का एक प्रयास बताते हुए कहा कि यह जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए हानिकारक है. इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कवींद्र गुप्ता ने कहा था कि राज्य प्रशासन पीआरसी प्रदान करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उसे जारी करने के लिए एक समयसीमा तय की जानी चाहिए. उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल को लिखे एक पत्र में कहा, हम ऐसे समय आपको पत्र लिखने के लिए बाध्य हैं जब आप स्थायी निवासी प्रमाणपत्र नियमों में परिवर्तन करने पर विचार कर रहे हैं. हमारी पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस का विचार है कि यह राज्य की जनसांख्यिकी बिगाड़ने का एक प्रयास है और यह जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए हानिकारक है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसएसी राज्य में संस्थानों के कामकाज और प्रक्रियाओं में एकपक्षीय रूप से परिवर्तन ला रहा है. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और भागीदारी शासन की भावना और सिद्धांत के खिलाफ है. उन्होंने कहा, (मीडिया) खबरों में कहा गया है कि ये प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित प्रक्रियाओं में परिवर्तन के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश पहले ही जारी कर दिये गये हैं. उन्होंने कहा, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में किसी भी राजनीतिक पार्टी या अन्य हितधारक के साथ कोई व्यापक मशविरा नहीं किया गया. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इससे संवेदनशील जम्मू कश्मीर में शांति भंग हो सकती है. उन्होंने एसएसी के कथित कदम के समय की ओर भी इशारा किया.

उन्होंने कहा कि विधानसभा भंग है और चुनाव अगले कुछ महीनों में होनेवाले हैं. इससे आपके प्रशासन के कदम पर सवाल उठाये जा सकते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि सरकार की भूमिका की प्रकृति एक कार्यवाहक सरकार की अधिक है. अब्दुल्ला ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि आप इस संबंध में अपने निर्णय को वासप लेंगे. हम इस कदम पर अपनी अप्रसन्नता दर्ज कराना चाहते हैं और इसका विरोध करने के लिए सर्वसम्मति से किये गये निर्णय से अवगत कराना चाहते हैं.

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