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COMCASA Deal : भारत को अमेरिका से मिलेगी महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकी

Updated at : 06 Sep 2018 4:45 PM (IST)
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COMCASA Deal : भारत को अमेरिका से मिलेगी महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकी

नयी दिल्ली : भारत और अमेरिका ने गुरुवार को एक करार पर हस्ताक्षर कर दिये जिस पर लंबे समय से दोनों पक्ष चर्चा कर रहे थे. इस करार के तहत भारतीय सेना को अमेरिका से महत्वपूर्ण एवं एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी. अधिकारियों ने यहां बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और […]

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नयी दिल्ली : भारत और अमेरिका ने गुरुवार को एक करार पर हस्ताक्षर कर दिये जिस पर लंबे समय से दोनों पक्ष चर्चा कर रहे थे. इस करार के तहत भारतीय सेना को अमेरिका से महत्वपूर्ण एवं एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी.

अधिकारियों ने यहां बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिकी विदेश मंत्री एमआर पोंपिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के बाद ‘संचार, संगतता, सुरक्षा समझौते’ (कम्यूनिकेशन्स कॅम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किये गये. सीओएमसीएएसए (कॉमकासा) करार होने से भारत को अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियां हासिल करने का रास्ता साफ हो जायेगा और अमेरिका तथा भारतीय सशस्त्र बलों के बीच अंतर-सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क तक उसकी पहुंच होगी. अधिकारियों ने कहा कि इससे अमेरिका से मंगाये जा रहे रक्षा प्लेटफॉर्मों पर उच्च सुरक्षा वाले अमेरिकी संचार उपकरणों को लगाया जा सकेगा.

भारत और अमेरिका के बीच हुई ऐतिहासिक वार्ता के बाद दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर वार्ता को रचनात्मक बताया. खास बात यह है कि भारत पहला ऐसा गैर-नाटो देश होगा, जिसे अमेरिका यह सुविधा देने जा रहा है. इसके अलावा वार्ता में आतंकवाद के खिलाफ आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपिओ ने कॉमकासा समझौते को काफी अहम बताया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ‘टू प्लस टू’ वार्ता की अहमियत को बताते हुए कहा कि कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री की यह पहली संयुक्त यात्रा है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, आपसी व्यापार समेत तमाम मुद्दों पर बातचीत हुई. स्वराज ने कहा कि जून 2017 में वॉशिंगटन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच ‘टू प्लस टू’ वार्ता का फैसला लिया गया था. इस वार्ता में साझा सरोकारों के कई मसलों पर बातचीत हुई.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि वार्ता में एनएसजी में भारत की यथाशीघ्र सदस्यता के लिए सहमति बनी, अमेरिका इसके लिए सहयोग करेगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी आगे बढ़ रही है. दोनों देशों में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था से दोनों देशों को फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति करनेवाले देश के तौर पर उभर रहा है, कारोबार को संतुलित और परस्पर लाभकारी बनाने की कोशिश हो रही है. सुषमा स्वराज ने कहा कि अमेरिका द्वारा हाल में लश्करे तैयबा के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित करने का हम स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा, बातचीत में सीमापार आतंकवाद का मुद्दा भी उठा. सुषमा स्वराज ने कहा कि सीमापार आतंकवाद को समर्थन देने की पाकिस्तान की नीति के खिलाफ अमेरिका का रुख स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप की अफगान नीति का समर्थन करता है.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि बैठकों में कई प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्वराज और पोंपिओ की बैठक को लाभकारी बताया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रभावशाली प्रयासों की समीक्षा की और रिश्तों को और अधिक ऊंचे स्तर पर ले जाने के कदमों पर चर्चा की.

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