प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों से कहा, मुझसे सीधे संपर्क करें

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों से एक साथ मुलाकात की और उनसे कहा कि निर्णय प्रक्रिया को तेज करने तथा मुद्दों को सुलझाने के लिए वे उनसे सीधे संपर्क करें.किसी भी प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ अपनी तरह की यह पहली सीधी बैठक थी जो लगभग […]
नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों से एक साथ मुलाकात की और उनसे कहा कि निर्णय प्रक्रिया को तेज करने तथा मुद्दों को सुलझाने के लिए वे उनसे सीधे संपर्क करें.किसी भी प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ अपनी तरह की यह पहली सीधी बैठक थी जो लगभग तीन घंटे चली. इस बैठक के जरिए मोदी की मंशा पारदर्शी, त्वरित व प्रभावी राजकाज पर जोर देते हुए निर्णय प्रक्रिया में नौकरशाहों को बडी भूमिका देना है.
सूत्रों के अनुसार फैसलों व कार्य्रकमों का कार्यान्वयन लाल फीताशाही े में नहीं अटके यह सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सचिवों से कहा कि वे मुद्दों के समाधान या त्वरित निर्णय के लिए सुझाव या हस्तक्षेप की जरुरत हो तो सीधे उन्हें फोन या ईमेल करें.
किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार मंत्रियों की अनुपस्थिति में सभी सचिवों के साथ एक साथ बैठक की है. इसमें मोदी ने शुरआती संबोधन के बाद सचिवों से मुद्दे उठाने को कहा. लगभग 25 सचिवों ने अपने अधीन आने वाले क्षेत्रवार मुद्दों पर बात रखी.
सूत्रों ने कहा, विचार विमर्श राजकाज को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित रहा.इस बैठक में देश के 77 आला अफसर मौजूद थे जिनमें वित्त सचिव अरविंद मायाराम, गृह सचिव अनिल गोस्वामी, रक्षा सचिव राधाकृष्ण माथुर तथा विदेश सचिव सुजाता सिंह शामिल हैं.
सूत्रों ने बताया कि सम्बद्ध मंत्रालयों को एकसाथ कर 16 समूह बनाए गए हैं. वित्त मंत्रालय के सभी विभागों को एक साथ किया गया है जबकि उर्जा से जुडे विभागों .. बिजली, कोयला, तेल, खान व परमाणु उर्जा को एक साथ रखा गया है.उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सचिवों को बताया कि वे उनसे किस तरह के काम की अपेक्षा रखते हैं. सचिवों ने इस दौरान किसी तरह की प्रस्तुती (प्रजेंटेशन) नहीं दिया.
कैबिनेट सचिव अजित सेठ ने शुरआत में बात रखी. इसके बाद वित्त सचिव अरविंद मायाराम, बिजली सचिव पीके सिन्हा, भारी उद्योग सचिव शांतनु बेहुरिया व कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) सचिव एस के सरकार सहित अन्य आला अधिकारियों ने बात रखी.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सचिवों से कहा गया था कि वे प्रधानमंत्री के समक्ष रखने के लिए दस स्लाइड का प्रस्तुतिकरण तैयार करें जिनमें पिछली सरकार की सफलताएं व विफलताओं के साथ साथ अगले पांच साल में अपेक्षित कदमों का जिक्र हो. यह प्रक्रिया कल शुरु हो सकती है.
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के बैठक के लिये तैयार किये गये नोट में मुद्रास्फीति, राजकोषीय समेकन, चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना, कर प्रशासन में स्पष्टता और इस्पात, सीमेंट जैसे गैर-प्रमुख क्षेत्रों में विनिवेश शामिल है.
वाणिज्य सचिव राजीव खेर के एजेंडे में रक्षा, ई-वाणिज्य खुदरा क्षेत्र, रेलवे और निर्माण विकास और भूमि अधिग्रहण में आने वाली रकावटें तथा परियोजनाओं को मंजूरी देने की जटिल प्रक्रिया जैसे मुद्दे सबसे उपर हैं. कृषि सचिव अशीष बहुगुणा के नोट में मानसून की ताजा जानकारी और फसल खराब होने पर किसानों के हित साधने के लिये एक नई बीमा नीति प्रमुख रुप से शामिल किये गये हैं. उपभोक्ता मामले विभाग ने प्याज की बढती कीमतें को लेकर चिंता को सबसे शीर्ष पर रखा है.
पेट्रोलियम मंत्रालय की सूची में लंबित फैसलों पर अमल को रखा गया है. एक अप्रैल से प्राकृतिक गैस के दाम में होने वाली मूल्य वृद्धि का मामला भी इसमें शामिल है. बिजली मंत्रलय ने 24घंटे बिजली आपूर्ति को अपने एजेंडे में रखा है और इ’धन की कमी को दूर करना एजेंडे में शीर्ष पर है. इस्पात और खान मंत्रलय के एजेंडे में सेल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश और बंद खानों को खोलने पर जोर दिया गया है.
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