महाराष्ट्र निकाय चुनाव : मराठा आंदोलन के बीच भाजपा को दो नगर पालिकाओं में मिली जीत

Updated at : 03 Aug 2018 10:45 PM (IST)
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव : मराठा आंदोलन के बीच भाजपा को दो नगर पालिकाओं में मिली जीत

मुंबई : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को हराकर शुक्रवार को महाराष्ट्र की सांगली नगरपालिका चुनाव में बड़ी जीत हासिल की और पार्टी ने जलगांव नगरपालिका में भी जीत दर्ज कर शिवसेना को करारा झटका दिया है. इन दोनों नगरपालिकाओं में एक अगस्त को मतदान हुआ था. सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण […]

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मुंबई : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को हराकर शुक्रवार को महाराष्ट्र की सांगली नगरपालिका चुनाव में बड़ी जीत हासिल की और पार्टी ने जलगांव नगरपालिका में भी जीत दर्ज कर शिवसेना को करारा झटका दिया है. इन दोनों नगरपालिकाओं में एक अगस्त को मतदान हुआ था.

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लिए मराठा समुदाय द्वारा किये जा रहे आंदोलन के बीच भाजपा ने यह जीत हासिल की है. इस जीत को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) द्वारा घोषित परिणाम के अनुसार राज्य और केंद्र में शिवसेना की सहयोगी भाजपा ने जलगांव नगर निगम (जेएमसी) में 75 सीटों में से 57 सीटें जीतीं. शिवसेना नेता सुरेश जैन की खान्देश विकास आघाडी (केवीए) केवल 13 सीटें जीत सकीं. केवीए ने पिछले कई वर्षों तक जेएमसी में शासन किया. स्थानीय संगठन केवीए ने इस बार शिवसेना के चिह्न पर चुनाव लड़ा था और जेएमसी में उसकी 36 सीटें थीं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने तीन सीटों पर दर्ज की, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. एनसीपी को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि पहले उसके नगर निकाय में 11 पार्षद थे. कांग्रेस जलगांव में लगातार दूसरी बार अपना खाता भी नहीं खोल सकी. 2013 में जलगांव नगरपालिका में केवीए ने 36 सीटों पर जीत दर्ज की थी और इसके बाद भाजपा (15), मनसे (12), राकांपा (11) और निर्दलीय (1) हैं.

भाजपा ने सांगली-मिराज-कुपवाड़ नगरपालिका में 78 में से 41 सीटें हासिल की और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया. पश्चिमी महाराष्ट्र नगर निकाय में वर्तमान में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को केवल 20 सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी एनसीपी को केवल 15 सीटें मिली. अन्यों को दो सीटों पर जीत मिली. भाजपा का इस नगर निकाय में एक भी पार्षद नहीं था. इन दोनों नगरपालिकाओं में एक अगस्त को मतदान हुआ था और शुक्रवार को वोटों की गिनती हुई. सांगली के परिणाम को कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. इन दोनों दलों ने शहर में नगर निकाय चुनाव में पहली बार गठबंधन बनाया था.

राकांपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल और कांग्रेस नेता विश्वजीत कदम के साथ दोनों दलों के कई स्थानीय नेताओं ने भी गठबंधन के लिए जोरदार प्रचार किया था. फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन के मद्देनजर सांगली में अपनी जनसभाओं को रद्द कर दिया था. सांगली में 2013 में कांग्रेस ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी. राकांपा को 19, एमएनएस को एक और शेष सीटें निर्दलीय और अन्यों ने जीतीं थी. फडणवीस ने पत्रकारों से कहा कि मराठा आरक्षण आंदोलन के बावजूद जलगांव और सांगली में लोगों ने भाजपा को बड़ी तादाद में वोट दिये थे. उन्होंने कहा, ‘लोग जानते है कि नौकरियों और शिक्षा (मराठों के लिए) आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हमारी सरकार गंभीर हैं और इसलिए लोगों ने भाजपा को वोट दिये. लोग जानते हैं कि हम उनकी मांगों को पूरा कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा कि परिणामों से साबित हो गया है कि लोगों का भाजपा में विश्वास है. फडणवीस ने कहा, ‘सांगली में कांग्रेस और राकांपा ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन लोगों ने भाजपा पर विश्वास जताया.’ इससे पूर्व शिवसेना ने घोषणा की थी कि वह भविष्य में अकेले चुनाव लड़ेगी. राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि भाजपा ने ‘पैसों और बाहुबल’ का इस्तेमाल करके जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस नेता अनंत गाडगिल ने दावा किया कि भाजपा को सत्ता के ‘अनैतिक इस्तेमाल’ के कारण जीत मिली है.

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