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कांग्रेस का आरोप : राफेल सौदे से उजागर हुआ प्रधानमंत्री का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम''

Updated at : 27 Jul 2018 8:36 PM (IST)
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कांग्रेस का आरोप : राफेल सौदे से उजागर हुआ प्रधानमंत्री का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम''

नयी दिल्ली : राफेल विमान सौदे में कथित अनियमितता को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर बनी कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ‘सारे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए’ एक निजी समूह को इस विमान से जुड़ा कांट्रैक्ट दिया गया. इससे प्रधानमंत्री का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम’ (छद्म पूंजीवाद से प्रेम) उजागर होता है. पार्टी […]

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नयी दिल्ली : राफेल विमान सौदे में कथित अनियमितता को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर बनी कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ‘सारे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए’ एक निजी समूह को इस विमान से जुड़ा कांट्रैक्ट दिया गया. इससे प्रधानमंत्री का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम’ (छद्म पूंजीवाद से प्रेम) उजागर होता है. पार्टी ने यह भी दावा किया कि इस लड़ाकू विमान सौदे के संदर्भ में एक नामी भारतीय समूह की रक्षा कंपनी को कुल 1,30,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है.

इसे भी पढ़ें : राफेल डील पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, एक दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्‍ताव की तैयारी

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा और उन पर देश से झूठ बोलने का आरोप लगाया. सुरजेवाला ने कुछ दस्तावेज सामने रखते हुए संवाददाताओं से कहा कि राफेल सौदे की आये दिन खुलती परतें प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री द्वारा बोले गये झूठ की परतें खोल रही हैं. कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज्म (छद्म पूंजीवाद की संस्कृति) मोदी सरकार का डीएनए बन गयी है. इस सौदे से गहरी साजिश, धोखाधड़ी व सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के षडयंत्र की बू आती है.

उन्होंने कहा कि मोदी जी का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम’ तब जगजाहिर हो गया, जब 10 अप्रैल, 2015 को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की उनके द्वारा की गयी एकतरफा घोषणा के फौरन बाद सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इस सबसे बड़े ‘रक्षा ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ से अलग कर दिया गया और इसे एक निज़ी क्षेत्र की कंपनी को दे दिया गया. प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री इसका कारण क्यों नहीं बता रहे?

उन्होंने दावा किया कि कांट्रेक्ट एक निजी भारतीय समूह की रक्षा कंपनी को दिया गया, जबकि यह कंपनी समझौते से 12 दिन पहले पंजीकृत हुई थी और उसके पास विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है. सुरजेवाला के मुताबिक, इस निजी भारतीय कंपनी ने पिछले साल 16 फरवरी को बयान जारी कर कहा कि उसे राफेल से जुड़ा 30,000 करोड़ रुपये का ‘ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ और 1,00,000 करोड़ रुपये का ‘लाइफ साइकल कॉन्ट्रैक्ट’ मिला है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि एक सरकारी विज्ञप्ति में रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें निजी कंपनी को ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट दिये जाने की जानकारी नहीं है. कांग्रेस नेता ने ‘सारे नियमों की धज्जियां उड़ाये जाने’ का आरापे लगाते हुए कहा कि ‘राष्ट्रीय हितों के साथ हुए खिलवाड़’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देना चाहिए. सुरजेवाला ने सवाल किया कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण देश से क्यों झूठ बोल रही हैं? क्या प्रधानमंत्री स्वीकार करेंगे कि एचएएल से कॉन्ट्रैक्ट छीनकर एक निजी समूह को दिया गया ? क्या रक्षा मंत्री की अनुमति के बगैर ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट किया गया?

राफेल विमान सौदे में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमले कर रही है. इस मामले में पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री सीतारमण के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रखा है. कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने राफेल मामले पर सदन और देश को गुमराह किया है.

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