कर्नाटक चुनाव : सिद्धारमैया का रेड्डी के खास श्रीरामुलु से टक्कर

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II बेंगलुरु से अजय कुमार II कर्नाटक में माइनिंग किंग रेड्डी बंधुओं के करीबी बी श्रीरामुलु के राजनीति में उभरने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है. उनका रसूख इससे भी समझा जा सकता है कि पार्टी के बड़े नेताओं ने उनके लिए प्रचार किया. दबंग छवि के श्रीरामुलु के बारे में बेंगलुरु भाजपा कार्यालय में […]

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II बेंगलुरु से अजय कुमार II
कर्नाटक में माइनिंग किंग रेड्डी बंधुओं के करीबी बी श्रीरामुलु के राजनीति में उभरने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है. उनका रसूख इससे भी समझा जा सकता है कि पार्टी के बड़े नेताओं ने उनके लिए प्रचार किया. दबंग छवि के श्रीरामुलु के बारे में बेंगलुरु भाजपा कार्यालय में एक कार्यकर्ता ने कहा: आपके बिहार में जैसे दबंग राजनीतिज्ञ होते हैं, ठीक वैसे ही हैं श्रीरामुलु. वह आदिवासी हैं. रेड्डी बंधु उन्हें मुंहबोला भाई कहते हैं. श्रीरामुलु खनन माफिया के तौर पर नाम कमा चुके जनार्दन रेड्डी के करीबी हैं.
जनार्दन के खनन कारोबार में शुरू से श्रीरामुलु उनके साथ हैं. हालांकि तब उनकी भूमिका खास नहीं थी, पर वह रेड्डी के लिए छोटी-मोटी दिक्कतों को सुलझाने, पुलिस या किसी तीसरे पक्ष से विवाद निबटाने जाते थे. श्रीरामुलु को रेड्डी बंधुओं की अकूत संपत्ति हासिल करने के तौर-तरीकों का बड़ा राजदार कहा जाता है. बीते आम चुनाव में वह जनार्दन रेड्डी के बेल्लारी सीट से चुनाव लड़े और उनके समर्थन से चुनाव जीते.
उन्हें भाजपा का टिकट दिलाने से लेकर जीत सुनिश्चित करने में रेड्डी बंधुओं की बड़ी भूमिका थी. खनन मामले में रेड्डी बंधुओं को सितंबर 2011 में गिरफ्तार किया. 2008 के येदियुरप्पा सरकार में जनार्दन और उनके बड़े भाई करुपाकर रेड्डी मंत्री थे. बाद में रेड्डी बंधुओं ने जब भाजपा से अलग खुद की पार्टी बनायी, तो श्रीरामुलु भी उनके साथ थे. अब रेड्डी बंधुओं की पार्टी का भाजपा में विलय हो चुका है. चुनाव में अमित शाह ने साफ कर दिया था कि प्रचार से रेड्डी को दूर रखा जायेगा.
रेड्डी बंधुओं के हैं खास, चढ़ते गये राजनीति की सीढ़ियां
सिद्धारमैया के खिलाफ आनन-फानन में भरा परचा
यह भी रोचक है कि श्रीरामुलु के दो जगहों से चुनाव लड़ने की चर्चा दूर-दूर तक नहीं थी. पर जैसे ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बरूणा सीट के बदले बादमी से टिकट भरा, आनन-फानन में श्रीरामुलु ने उनके खिलाफ परचा भर दिया.
उसके पहले उन्होंने सुरक्षित मोलाकालमुरू से परचा भरा था. स्थानीय पत्रकार जयपाल शर्मा कहते हैं कि मोलाकालमुरू में बैंड-बाजे के साथ श्रीरामुलु ने परचा दाखिल किया था. लेकिन बादामी में ऐसा नहीं हुआ. सिद्धारमैया के परचा दाखिल करने के थोड़ी देर बाद ही पांच लोगों के साथ वह गये व नामांकन कर दिया. इस तरह श्रीरामुलु सामान्य और सुरक्षित दोनों सीटों से लड़ रहे हैं.
बादामी का क्या है समीकरण
भाजपा हर हाल में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को घेरना चाहती है. यही वजह थी कि परचा भरने के फौरन बाद श्रीरामुलु को उतारा गया. बादामी विस में लिंगायत और दलित जातियों के वोट निर्णायक हैं. लिंगायतों को भाजपा का स्वाभाविक वोटर माना जाता है.
कम से कम तीन दशकों का ट्रेंड तो यही बताता है. लिंगायत और दलितों के वोट अगर एक साथ आ गये, तो सिद्धारमैया के लिए मुश्किल हो सकती है. श्रीरामुलु की छवि और रेड्डी बंधुओं के भरपूर सपोर्ट से बादामी का किला फतह करना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए आसान नहीं माना जा रहा है.
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