ePaper

अध्यादेश के बाद स्वाति मालिवाल ने तोड़ा दस दिनों से जारी अनशन

Updated at : 22 Apr 2018 3:36 PM (IST)
विज्ञापन
अध्यादेश के बाद स्वाति मालिवाल ने तोड़ा दस दिनों से जारी अनशन

नयी दिल्ली : दिल्ली महिला आयोग ( डीसीडब्ल्यू ) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड समेत ऐसे अपराधों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान संबंधी अध्यादेश की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उद्घघोषणा होने के बाद आज अपनी भूख हड़ताल खत्म कर ली. वह […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : दिल्ली महिला आयोग ( डीसीडब्ल्यू ) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड समेत ऐसे अपराधों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान संबंधी अध्यादेश की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उद्घघोषणा होने के बाद आज अपनी भूख हड़ताल खत्म कर ली. वह पिछले दस दिनों से यहां राजघाट पर भूख हड़ताल पर बैठी हुई थीं. उन्होंने इस अध्यादेश पर लोगों को बधाई दी और कहा कि बहुत कम प्रदर्शनों ने इतने कम समय में इतना कुछ हासिल किया. उन्होंने सरकार के फैसले को स्वतंत्र भारत के लिए ‘ ऐतिहासिक जीत ‘ बताया.

केंद्रीय मंत्री का विवादित बयान, ‘इतने बड़े देश में एक-दो रेप की घटनाएं हो तो बात का बतंगड़ ना बनाएं’

आपराधिक कानून ( संशोधन ) अध्यादेश , 2018 के अनुसार बलात्कार के मामलों से निबटने के लिए नयी त्वरित अदालतें स्थापित की जाएंगी तथा कालांतर में सभी थानों एवं अस्पतालों को विशेष फोरेंसिक किट्स दिये जाएंगे. अधिकारियों ने इस अध्यादेश का हवाला देते हुए बताया कि उसमें खासकर 12-16 साल की उम्र की लड़कियों से बलात्कार के दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. बारह साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ ऐसा जघन्य कृत्य करने वालों को मृत्युदंड मिलेगा.

अपनी हड़ताल का समापन करते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा , ‘‘ हर रोज तीन , चार , छह साल की बच्चियों से नृशंसता के साथ बलात्कार हो रहा है. मैंने पत्र लिखे , नोटिस जारी किये. मैंने नागरिकों द्वारा लिखे गए 5.5 लाख पत्र प्रधानमंत्री को सौंपे. लेकिन सारा व्यर्थ गया. ‘ उन्होंने कहा , ‘‘ उसके पश्चात मैंने भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया. कोई रणनीति नहीं थी , धीरे धीरे पूरे देश में लोग इस आंदोलन से जुड़ते गये. उसे इतना बल मिला कि प्रधानमंत्री को भारत लौटने के बाद कानून में संशोधन करना पड़ा. मैं इस जीत के लिए भारत के लोगों को बधाई देते हैं. ‘ आयोग बलात्कार के मामलों से निबटने के लिए देशभर में त्वरित अदालतों के गठन एवं दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग करता रहा है.

मोदी सरकार का फैसला : बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात से बढ़ाकर 10 वर्ष की गयी

क्या थी स्वाति मालिवाल की मांग

स्वाति मालीवाल ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छह मांगें उठाई थीं. उन्होंने अध्यादेश पारित करने , संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से पुलिस कर्मी तैनात करने और पुलिस बलों की जवाबदेही तय करने की मांग रखी थी. स्वाति मालीवाल ने कहा था कि दुष्कर्म के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा सुनायी जाये.
गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग बीते ढाई साल से ऐसा सिस्टम बनाने की मांग कर रहा है जिसमें जो भी छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार करे, उसे 6 महीने में फांसी की सजा दी जाए. आयोग ने इस मांग केलिए 5.5 लाख पत्र पहले प्रधानमंत्री को भिजवाए थे. देश की बहादुर बेटी निर्भया के नाम पर जो निर्भया फंड बना था आज वो भी उपयोग नही हो पा रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola