एससी/एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार दायर करेगी पुनरीक्षण याचिका

Updated at : 28 Mar 2018 6:24 PM (IST)
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एससी/एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार दायर करेगी पुनरीक्षण याचिका

नयी दिल्ली : एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर करने पर विचार करेगी. सुप्रीमकोर्ट ने 20 मार्च को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल गिरफ्तारी से संबंधित सख्त प्रावधान को थोड़ा हल्का कर दिया था. इस विषय पर सत्ता पक्ष […]

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नयी दिल्ली : एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर करने पर विचार करेगी. सुप्रीमकोर्ट ने 20 मार्च को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल गिरफ्तारी से संबंधित सख्त प्रावधान को थोड़ा हल्का कर दिया था. इस विषय पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दल सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं. अब सरकार कोर्ट से इस फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहेगी. हालांकि, सोमवार को कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि कोर्ट अपने मुख्य फैसले पर विचार नहीं करेगी.

गौरतलब है कि 20मार्च को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने एससी/ एसटी एक्ट को रिव्यू करते हुए कहा था कि अगर केस पहली नजर में निराधार या गलत इरादे से दाखिल लगता है तो आरोपी को अग्रिम जमानत मिल सकती है. इस फैसले के बाद ही गुजरात हाई कोर्ट ने एक बिल्डर को अग्रिम जमानत दे दी थी. कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि एससी/एसटी उत्पीड़न एक्ट के तहत अब तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. कोर्ट ने इस एक्ट के तहत आनेवाली शिकायतों पर शुरुआती जांच के बाद ही मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया है. अगर, किसी के खिलाफ एससी/एसटी उत्पीड़न का मामला दर्ज होता है, तो वो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकेगा.

सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग की आशंका के मद्देनजर उनकी गिरफ्तारी से पहले उनके विभाग के सक्षम अधिकारी की मंजरी जरूरी होगी. बाकी लोगों को गिरफ्तार करने के लिए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की इजाजत जरूरी होगी. इस एक्ट के तहत शिकायत मिलने पर डीएसपी स्तर के अधिकारी प्राथमिक जांच करेंगे. वो ये देखेंगे कि मामला वाकई बनता है या सिर्फ फंसाने की नीयत से शिकायत की गयी है. इसके बाद ही मुकदमा दर्ज होगा

मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के सांसदों के शिष्टमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर चर्चा की.

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