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मंगोलियाई जवानों को स्नाइपर निशानेबाजी की ट्रेनिंग दे रहे हैं बीएसएफ के जवान

Updated at : 13 Feb 2018 4:09 PM (IST)
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मंगोलियाई जवानों को स्नाइपर निशानेबाजी की ट्रेनिंग दे रहे हैं बीएसएफ के जवान

इंदौर : भारत का सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपने मंगोलियाई समकक्ष बल के अफसरों को स्नाइपर हथियारों के कुशल इस्तेमाल के गुर सिखा रहा है. स्नाइपर हथियार लम्बी दूरी पर स्थित दुश्मन पर छिपकर निशाना लगाने में सक्षम आग्नेय अस्त्र होते हैं. इंदौर में बीएसएफ के केंद्रीय आयुध और युद्ध कौशल विद्यालय (सीएसडब्ल्यूटी) के महानिरीक्षक […]

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इंदौर : भारत का सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपने मंगोलियाई समकक्ष बल के अफसरों को स्नाइपर हथियारों के कुशल इस्तेमाल के गुर सिखा रहा है. स्नाइपर हथियार लम्बी दूरी पर स्थित दुश्मन पर छिपकर निशाना लगाने में सक्षम आग्नेय अस्त्र होते हैं.

इंदौर में बीएसएफ के केंद्रीय आयुध और युद्ध कौशल विद्यालय (सीएसडब्ल्यूटी) के महानिरीक्षक (आईजी) बीके मेहता ने मंगलवार को बताया ​कि मंगोलिया की जनरल अथॉरिटी फॉर बॉर्डर प्रोटेक्शन (जीएबीपी) के अफसरों का 10 सदस्यीय दल उनके संस्थान में स्नाइपर हथियारों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल हो रहा है.

उन्होंने बताया कि इस दल में सार्जेंट से लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर तक के अफसर शामिल हैं. मेहता ने बताया कि करीब दो हफ्ते के पाठ्यक्रम की कल 12 फरवरी को शुरुआत हुई. इसमें मंगोलियाई अफसरों को अलग-अलग हालात में स्नाइपर हथियारों के रणनीतिक इस्तेमाल के साथ इनके रख-रखाव के गुर भी सिखाये जायेंगे.

उल्लेखनीय है कि भारत और मंगोलिया, चीन के पड़ोसी मुल्क हैं. दोनों देशों की सरहदें चीन से सटी हैं. सीएसडब्ल्यूटी के द्वितीय कमान अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि बीएसएफ का सात सदस्यीय प्रशिक्षक दल मंगोलियाई अफसरों को स्नाइपर हथियारों का कुशल उपयोग सिखा रहा है.

सिंह ने बताया कि मंगोलियाई अफसरों को कक्षाओं में हथियारों का सैद्धांतिक ज्ञान देने के साथ खुले इलाके में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. रक्षा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक भारत का बीएसएफ और मंगोलिया का जीएबीपी सरहदों की निगहबानी के दौरान लगभग समान परिस्थितियों में काम करते हैं और एक जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं.

भारत मंगोलिया को पहले ही भरोसा दिला चुका है कि वह विशेष अभियानों, साइबर सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, हथियार और युद्ध कौशल, बम निष्क्रिय करना, आपदा प्रबंधन आदि क्षेत्रों में क्षमता निर्माण करने में जीएबीपी को हरसंभव सहायता करेगा.

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